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CBI बयान दर्ज करा रही थी, स्टेनो की कैब आई, वो उठकर चली गई

नई दिल्ली। क्या कोई कर्मचारी अदालत की चलती कार्रवाई को बीच में छोड़कर जा सकता है। यहां ऐसा ही एक मामला सामने आया है। महिला स्टेनोग्राफर उस समय अदालत की कार्रवाई को बीच में ही छोड़ चली गई जबकि सीबीआई वीडियो कांफ्रेंसिंग में अपने गवाह के बयान रिकॉर्ड करा रही थी। वकीलों और दूसरे संबंधित लोगों से भरी कोर्ट को पूरे 510 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। दूसरा स्टेनोग्राफर आया तब कहीं जाकर कार्रवाई शुरू हो सकी। कोर्ट ने अपने फैसले में इसका उल्लेख किया है। 

भ्रष्टाचार के मामले में एक विशेष अदालत कोलकाता से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सीबीआई के एक गवाह का बयान दर्ज कर रही थी। इसी दौरान एक महिला स्टेनोग्राफर अचानक यह कहते हुए कोर्ट रूम से निकल गई कि उसकी कैब बाहर इंतजार कर रही है, इसलिए वह जा रही है। कार्यवाही के बीच से उठकर चले जाने की इस घटना को अदालत ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि महिला स्टेनोग्राफर ने लाइव सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम से बाहर जाकर ‘पीठ का अपमान’ और अदालत के ‘अधिकारों को कमतर’ किया है।

अदालत ने स्टेनोग्राफर की इस हरकत से पैदा हुई स्थिति को बहुत खराब मामला बताया। उसने कहा कि कई वकीलों की मौजूदगी में चल रही लाइव वीडियो कांफ्रेंसिंग की प्रक्रिया को महिला कर्मचारी ने ‘हाईजैक’ कर लिया। इससे यहां बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों में बहुत बुरी छवि बनी। स्टेनोग्राफर की इस हरकत को जज ने अपने आदेश में दर्ज किया है। कोर्ट ने कहा कि अदालत के कर्मचारी ने कार्यवाही में बाधा पैदा की। अदालत कक्ष में मौजूद अधिकारियों और वकीलों को तब तक खाली बैठना पड़ा जब तक दूसरा स्टेनोग्राफर नहीं पहुंच गया।

आदेश में कहा गया है कि महिला कर्मचारी को चेताया गया था कि वह कोर्ट की कार्यवाही के बीच में उठकर नहीं जा सकती। दूसरे स्टेनोग्राफर की टांग में फ्रैक्चर है और वह कोर्ट रूम में अपना लंबित कार्य निपटा रहा है। इसका भी महिला कर्मचारी पर कोई असर नहीं पड़ा और वह जाने की जिद करने लगी। 

जज ने इस मामले को जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) को भेज दिया है ताकि आरोपी कर्मचारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके। जज ने कहा, ‘न्यायिक शिष्टाचार को बनाए रखने के लिए यह अदालत अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकती है लेकिन न्यायिक बाध्यताओं के चलते इस अदालत ने ऐसा नहीं करने का फैसला किया है। यही सही होगा कि इसे जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) को भेजा जाए।

क्या लिखा जज के आदेश में
जज ने लिखित आदेश में कहा, ‘यह उल्लेख करना उचित है कि अदालत को दूसरे स्टेनोग्राफर की व्यवस्था होने तक 510 मिनट का इंतजार करना पड़ा। स्टेनोग्राफर की हरकत से पैदा हुई स्थिति से यह छवि बनी कि अगर कार्यवाही को ‘हाईजैक’ कर दिया गया हो तो उसे रोक दिया जाना था।’

क्या हुआ था कोर्ट रूम में
यह घटना पिछले सप्ताह की है। कोर्ट रूम में भ्रष्टाचार के एक मामले में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए एक गवाह के बयान दर्ज हो रहे थे। तभी 4.25 बजे कोर्ट की स्टेनोग्राफर उठी और कहा कि वह जाना चाहती है।

उसकी कैब बाहर इंतजार कर रही है। इस पर महिला कर्मचारी को जज ने याद दिलाया कि कोर्ट का समय अभी नहीं हुआ है। इस पर उसने अजीब सी प्रतिक्रिया दी। वह जाने से पहले अपनी हाजिरी सुपरिटेंडेंट के ऑफिस में दर्ज करेगी और तब तक पांच बज जाएंगे।