माता सीता के लिए मंत्री से भिड़ गए DIGVIJAY SINGH

Thursday, April 13, 2017

नई दिल्ली। राज्यसभा में सांसद दिग्विजय सिंह माता सीता के जन्मस्थान को लेकर केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा से भिड़ गए। मंत्री ने सदन में कहा था कि 'हालांकि सीताजी के जन्म का कोई प्रमाण नहीं है।' इस पर दिग्विजय सिंह ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि क्या भगवान राम और सीता के स्वयंवर के प्रमाण हैं। यदि सरकार रामसेतु के लिए गंभीर है तो माता सीता के जन्मस्थान के लिए इस तरह का जवाब क्यों दे रही है। केंद्रीय मंत्री ने अपने लिखित जवाब के बचाव में कहा कि सीता के जन्मस्थान को लेकर कोई प्रश्नचिह्न नहीं है और वाल्मीकि रामायण में इसका जिक्र किया गया है।

प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सदस्य प्रभात झा ने बिहार के सीतामढ़ी क्षेत्र के विकास का विवरण चाहा जिसे वह विवादित जन्मभूमि नहीं मानते। जवाब में शर्मा ने कहा कि सरकार ने रामायण सर्किट विकसित करने की योजना बनाई है जिसमें सीतामढ़ी क्षेत्र भी शामिल है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह विरोध में तुरंत उठ खड़े हुए और सीता के जन्मस्थान को आस्था से जुड़ा मुद्दा बताने वाले बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसा कहने से साबित होता है कि प्रत्यक्ष प्रमाण पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।

डा. महेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह सच है कि वहां पुरातत्व विभाग ने कोई खुदाई नहीं की है लेकिन उनके जन्मस्थान को लेकर कोई प्रश्नचिह्न नहीं है। उन्होंने अपने जवाब में कहा कि मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर राज्य सरकार डीपीआर भेजेगी तो मंत्रालय मंजूरी देगा।

दरअसल भाजपा सांसद प्रभात झा ने सीतामढ़ी स्थित सीताजी के जन्मस्थान के जीर्णोद्धार और उस इलाके को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने का मामला राज्यसभा में उठाया था। उन्होंने कहा कि इस स्थान को लेकर कोई विवाद भी नहीं है। मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि मंदिर परिसर और विकास कार्य में शिथिलता पर वे बिहार सरकार से बात करेंगे।

विपक्ष ने प्रमाणिकता पर उठाई आपत्ति
इसी बीच दिग्विजय सिंह पूर्व में भेजे गए लिखित उत्तर में प्रमाणिकता शब्द को लेकर आपत्ति उठाई। उन्होंने कहा कि हमारे आराध्य राम की पत्नी सीता को लेकर जो बात लिखित उत्तर में कही गई उसके ठीक विपरीत बात सदन में कही जा रही है, मैं इसकी निंदा करता हूं। एक तरफ रामसेतु को लेकर सरकार गंभीर है, दूसरी ओर सीता को लेकर प्रमाण न होने की बात कहती है। क्या भगवान राम और सीता के स्वयंवर के प्रमाण हैं।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि आपने लिखित उत्तर को पूरी तरह नहीं पढ़ा। जिस समय दिग्विजय सिंह और मंत्री के बीच नोकझोंक हो रही थी, सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंच गए। मंत्री ने कहा कि आपने हमारा उत्तर संपूर्णता के साथ नहीं पढ़ा है। मंत्री ने बताया कि 20वीं सदी में वाल्मीकि रामायण में जन्मस्थली का जिक्र है इसलिए कोई प्रशभनचिह्न नहीं है। इसी बीच जदयू सांसद अनिल कुमार साहनी ने भी प्रभात झा का समर्थन किया और ऐतिहासिक मंदिर और उपेक्षित मिथिलांचल के विकास की बात कही। उन्होंने कहा कि सीता जी का अस्तित्व नहीं है तो राम का भी नहीं है। सीता जी का अपमान हुआ है उस इलाके का विकास क्यों नहीं करते हैं।

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