मप्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई ठप, 82 कॉलेज बंद होंगे

Updesh Awasthee
भोपाल। इंजीनियरिंग की डिग्री बेचने के मामले में मप्र पूरे देश में बदनाम हो गया था। यहां बच्चों को क्या पढ़ाया जाता था, इसका अनुमान आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां के कॉलेजों से निकलने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स को 3 से 5000 रुपए महीना सेलेरी आॅफर होती थी। पिछले 2 साल से हालात यह हैं कि स्टूडेंट्स एडमिशन लेने ही नहीं आ रहे। करोड़ों के कॉलेज धूल खा रहे हैं। पहले सीटें घटाईं, अब 82 प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होने की स्थिति में आ गए हैं। 

ये सभी वो कॉलेज हैं जिनमें चालू शैक्षणिक सत्र में 20 फीसदी या उससे भी कम प्रवेश हुए हैं। इस दशा में तकनीकी शिक्षा विभाग कॉलेजों में सुविधाओं की कमी का परीक्षण भी करा रहा है। इसकी रिपोर्ट मिलते ही कॉलेजों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 

प्रदेश में 192 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इसमें से 60 कॉलेजों की 200 ब्रांच में चालू शैक्षणिक सत्र में एक भी प्रवेश नहीं हुआ, जबकि 50 कॉलेजों की अधिकतर ब्रांचों में एक या दो प्रवेश हुए हैं। 14 कॉलेजों की किसी भी ब्रांच में प्रवेश नहीं हुआ है। इनमें भोपाल के छह कॉलेज शामिल हैं। इस स्थिति को तकनीकी शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। विभाग संबंधित कॉलेजों की सीटें खाली रहने के कारणों का पता लगा रहा है। इसके लिए अफसरों की कमेटी बनाई गई है। इस साल इंजीनियरिंग कॉलेजों की 78 हजार सीटों में से करीब 32 हजार पर प्रवेश हुए हैं।
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