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दक्षिण भारत के महापण्डित दिनकर राव पन्त ने बसाया था चिटगल

राजेन्द्रपन्त‘रमाकान्त’। जनपद पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट तहसील के अंतर्गत भैरंग पट्टी क्षेत्र में स्थित चिटगल गांव अपनी अलौकिक छटाओं के लिए जितना प्रसिद्ध है उससे ज्यादा कहीं आध्यात्मिक समृद्धता के लिए प्रसिद्ध है। सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में गंगावली के इस गांव का गौरवशाली इतिहास रहा है। महर्षि पाराशर गोत्र के ब्राह्मणों के अलावा क्षत्रिय आदि अन्य जातियां यहां निवास करती हैं। 

इस गांव को बसाने का श्रेय दक्षिण भारत से यहां पधारे दिनकर राव पन्त को जाता है। बाद में वंश विस्तार के साथ श्री कालेश्वर के पुत्र कालशिला, पिपलेत आदि अनेको क्षेत्रों में बसते चले गये। यह गांव अनेक रहस्यमयी गाथाओं को भी अपने आप में समेटे है। इस गांव की मुख्य देवी गुस्याणी देवी है। इनके पिता हीरामणी दादा वशिष्ठ व परदादा व्यास जी थे। 

कहा जाता है कि जब गंगोली क्षेत्र में राजाओं का राज था उस दौर में गुस्याणी का जन्म हुआ। राज कर की झंझावत में बालपन में ही गंगोलीहाट-जजुट पैदल मार्ग पर मणकोट के पत्थर में इन्हें जोरदार तरीके से पटका गया। मणकोट के पत्थर पर पछेटी गयी इस देवी के प्रतीक चिन्ह आज भी उस पत्थर पर देखा जा सकता है। कहा जाता है कि पत्थर पर पछेटी जाने के बाद गुस्याणी अदृश्य हो गयी। प्रतीक पत्थर पर शेष रह गया और बाद में समूचे क्षेत्र में हाहाकार मच गया। 

महाकालिका के आंचल में हुई इस अन्याय भरी अकाल अबोध मौत को शायद महाकाली भी बर्दाश्त नहीं कर सकी और गंगावली घाटी त्राहिमाम हो उठी। बाद में इन्हीं देवी की कृपा से क्षेत्र में आयी विपदाएं शांत हुई और इन्हें देवी के रूप में पूजा जाने लगा। इस विषय पर बहुत लम्बी दंत कथा है जिसे स्थानीय लोगों के मुंह से सुना जा सकता है।  विश्व प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर गुफा की खोज का श्रेय भी चिटगल गांव के गोभेन पाराशर को जाता है।  

बहरहाल इस देवी की स्तुति के बिना चिटगल वाले आज भी कोई कार्य प्रारंभ नहीं करते हैं। दिल्ली, बम्बई, हल्द्वानी, देहरादून आदि क्षेत्रों में बसे प्रवासी जब गांव आते हैं तो गुस्याणी को अवश्य पूजते हैं।

सोचनीय विषय तो यह है कि महान धर्मात्मा दिनकर राव, प्रकाण्ड ज्योतिषविद पूर्णानन्द, व्यास, बैकुण्ठ, वणीराम, वीरभद्र, लोकमणी, गुणानन्द, गदाधर, विष्णुदत्त, विदराम ज्यू, महेश्वर, बैकुण्ठ ज्यू, गोविन्द बल्लभ, हर्कदेव, रूद्रदत्त, नन्दकेश्वर, कृष्णानन्द, देवीदत्त जैसे महान  पराक्रमी विद्वान, धर्मज्ञ, ज्योतिषविदों का यह गांव आज विराने की ओर              अग्रसर है।