रसूखदार मंत्री-अफसरों के खिलाफ जाँच पेंडिंग क्यों है: हाईकोर्ट

Updesh Awasthee
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंत्रियों-अफसरों के खिलाफ समयबद्ध तरीके से जांच के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने 24 फरवरी तक का समय दिया गया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश अजय माणिकराव खानविलकर व जस्टिस संजय यादव की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे ने अपना पक्ष स्वयं रखा।

95 में से 31 के खिलाफ जांच बेहद धीमी
उन्होंने दलील दी कि लोकायुक्त ने 95 मंत्रियों-अफसरों के खिलाफ केस दर्ज किए हैं। इनमें से 31 के खिलाफ अब तक जांच लंबित है। जबकि इनमें से कई केस 2002, 2005 और 2007 के हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जांच की गति किस कदर कछुआ चाल चल रही है। लोकायुक्त ने कुल 11 मंत्रियों के खिलाफ केस दर्ज किए थे, जिनमें से 9 का निपटारा करने की जानकारी दी गई, जबकि 2 की जांच बाकी है।

46 आईएएस में से 15, 10 आईपीएस में से 3, 10 आईएफएस में से 3, 26 एसएएस में से 7 और 3 एसपीएस में से 2 के खिलाफ जांच का निपटारा होना शेष है। इसकी सबसे बड़ी वजह लोकायुक्त द्वारा समयबद्ध तरीके से जांच प्रक्रिया को गति न देना है। लिहाजा, हाईकोर्ट को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करना चाहिए।

मंत्री 3 या 2 तय नहीं!
बहस के दौरान यह बात भी उठाई गई कि जहां एक ओर लोकायुक्त ने हाईकोर्ट में जानकारी पेश करके महज 2 मंत्रियों के खिलाफ जांच बाकी होने की बात कही है, वहीं दूसरे दस्तावेजों के मुताबिक फिलहाल 2 नहीं 3 मंत्रियों के खिलाफ जांच शेष है। इनमें जयंत मलैया, बाबूलाल गौर व अनूप मिश्रा के नाम शामिल हैं। हाईकोर्ट को इस बारे में भी लोकायुक्त को वस्तुस्थिति स्पष्ट करने निर्देश जारी करने चाहिए।

11 मंत्रियों के नाम इस प्रकार
लोकायुक्त ने जिन 11 मंत्रियों के खिलाफ शिकायतों को जांच में लिया, उनमें लक्ष्मीकांत शर्मा, अजय विश्नोई, जयंत मलैया, बाबूलाल गौर, कैलाश विजयवर्गीय, अनूप मिश्रा, चौधरी चन्द्रभान सिंह, कमल पटैल, अखंड प्रताप सिंह, महेन्द्र हार्डिया और राघवजी के नाम शामिल थे।

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