भोपाल। लोकायुक्त छापे में रिश्वत लेते धरे गए आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के संयुक्त संचालक डीडी महाजन जन्मतिथि में जालसाजी के भी आरोपी हैं। उन्होंने अपनी सेवा पुस्तिका में कूटरचना कर डाली। जांच में दोषी भी पाए गए परंतु कार्रवाई नहीं हुई।
वर्ष 2013 में संभागीय कार्यालय उज्जैन में पदस्थ हुए महाजन के खिलाफ वर्ष 2012 में विभाग के तत्कालीन आयुक्त डॉ. एसपी शर्मा ने जांच की थी। जिसमें पाया गया था कि महाजन ने वर्ष 2003 में जिला योजना अधिकारी रहते हुए सेवा पुस्तिका में हेराफेरी कर जन्मतिथि 26 फरवरी 1958 के स्थान पर 26 फरवरी 1960 कर ली।
पेंशनर्स संघ के उपाध्यक्ष जीडी जोशी को सूचना के अधिकार में दी जानकारी में जांच अधिकारी ने बताया है कि महाजन ने अपनी गलती भी स्वीकार कर ली है। यह जांच रिपोर्ट 18 सितंबर 2012 को विभाग के सचिव और मुख्य सचिव के निज सचिव को सौंपी गई, लेकिन महाजन पर कार्रवाई नहीं हुई है।
जोशी ने आरोप लगाया कि दोषी पर कार्रवाई करने के बजाय विभाग के आला अधिकारियों ने उन्हें लगातार बचाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महाजन को न सिर्फ संभागीय कार्यालय उज्जैन की जिम्मेदारी सौंपी गई, बल्कि उनके लिए वर्ष 2003, 2004 और फिर 2012 में वरिष्ठता सूची भी जारी की गई। हैरत की बात तो यह है कि महाजन को बचाने के लिए विभाग ने दो साल पुरानी पदक्रम सूची में परिवर्तन कर दिया। जोशी के मुताबिक वर्ष 2004 की वरिष्ठता सूची में महाजन की जन्मतिथि 26 फरवरी 1960 अंकित है। जबकि 2012 की पदक्रम सूची में 26 फरवरी 1958 हो गई और यह संशोधन 4 अगस्त 2014 को हुआ है। जोशी ने बताया कि लोकायुक्त की नोटशीट में प्रकरण को समाप्त करना बताया गया है, जबकि सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी में लोकायुक्त कार्यालय ने बताया कि शिकायत की जांच चल रही है।

