चैक बाउंस: IAS रश्मि के खिलाफ अरेस्ट वारंट

अजमेर। चेक अनादरण के एक मामले में पेशियों से गैर हाजिर रहने पर महिला आईएएस अधिकारी रश्मि प्रियदर्शनी को अजमेर की एक अदालत ने गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के आदेश दिए हैं। वरिष्ठ महिला आईएस अधिकारी और दिल्ली स्थित राजस्थान सरकार के संपत्ति नियंत्रक कार्यालय में क्षेत्रीय आयुक्त के पद पर पदस्थापित है। मामले में जून माह में सुनवाई की जाएगी।

महिला आईएएस प्रियदर्शनी ने अजमेर में राजस्व मंडल सदस्य रहते हुए कचहरी रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक से 23 जनवरी 2002 को एक लाख रूपए का ऋण लिया था। मंडल की तत्कालीन सदस्य गुरजोत कौर ने बैंक ऋण के लिए उनकी गांरटी दी थी। बैंक का ऋण नहीं चुकाने पर बैंक ने अदालत में 23 अगस्त 2005 को रश्मि के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत परिवाद दर्ज किया।

मामले में अदालत में एक बार उपस्थिति देने के बाद प्रियदर्शनी अदालत में नहीं आई, जबकि उनकी ओर से अदालत में हाजिरी से मुक्ति के लिए अर्जी दायर की जाती रही। इस बीच प्रकरण में उनके बयान की जरूरत पड़ी। उन्हें तलब करने के बावजूद भी वह गैरहाजिर रहीं। हाल ही में उनके नहीं आने पर अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट से तलब किया है।

वसूली का वाद भी डिक्री
पंजाब नेशनल बैंक की ओर से अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में ऋण वसूली को लेकर एक दीवानी वाद भी दायर किया था। इसमें बताया गया कि अप्रार्थी रश्मि प्रियदर्शनी ने अजमेर में राजस्व मंडल सदस्य रहते हुए कचहरी रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक से 23 जनवरी 2002 को एक लाख रूपए का ऋण लिया था।

मंडल की तत्कालीन सदस्य गुरजोत कौर ने बैंक ऋण के लिए उनकी गांरटी दी थी। मामला तय होने के बाद प्रियदर्शनी को अदालत में एक लाख 48 हजार 267 रूपए जमा कराने थे। इसमें से प्रार्थी ने एक लाख चार हजार 280 रूपए जमा करा दिए। शेष राशि 43 हजार 987 रूपए बकाया और उसके ब्याज के 8 हजार 357 रूपए सहित कुल 52 हजार 344 रूपए जमा नहीं कराए।

बैंक ने उक्त राशि जमा कराने का नोटिस दिया। रश्मि की ओर से नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। बैंक ने अदालत में इजराय की कार्रवाई शुरू कर दी है। उनकी ओर से कोर्ट में जो पता बताया गया वे वहां अब पदस्थापित नहीं होने के कारण नोटिस भी लौट कर आ गया है।
बैंक का ऋण नहीं चुकाने पर बैंक ने अदालत में रश्मि के खिलाफ चेक बाउंस का परिवाद दर्ज किया। इसमें बैंक ने 1 लाख 35 हजार 441 रूपए की मांग की।

करीब चार वर्ष तक चले मुकदमे के बाद रश्मि ने बकाया 1 लाख 41 हजार 201 रूपए और दावा खर्च के 6 हजार 347 रूपए सहित कुल 1 लाख 48 हजार 267 रूपए जमा कराने की सहमति दी। उनकी सहमति और 1 लाख 4 हजार 280 रूपए जमा कराने के बाद कोर्ट से 18 मई 2009 को दावा डिक्री कर दिया।

मैं पिछले काफी समय से बीमार चल रही हूं। मुझे गिरफ्तारी वारंट की जानकारी नहीं हैं। मैंने अधिकांश राशि जमा करा दी है। बकाया रकम भी जमा करा दूंगी।
रश्मि प्रियदर्शनी, आईएएस

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