लीजिए अब इग्नू में भी भर्ती घोटाला: सीबीआई जांच शुरू

Updesh Awasthee
राजेश शुक्ला/अनूपपुर। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातिय विश्वविद्यालय अमरकंटक में 18 जून को एक बड़ा मामला उजागर हुआ, जब सीबीआई और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की टीम 18 से 19 जून तक संयुक्त जांच के बाद विश्व विद्यालय में भर्ती घोटाला में 7 नियुक्तियो को संदिग्ध माना है।

जिसमें विश्व विद्यालय के पूर्व कुलपति सीडी सिंह द्वारा वर्ष 2010 से 2012 में अपने ही गृहक्षेत्र के रिश्तेदारो तथा जान पहचान के लोगो की नियुक्ति की जिनमें 5 प्रोफेसर तथा २ असिसटेंट रजिस्ट्रार है। इसके साथ ही सीबीआई ओर एमएचआरडी पूर्व कुलपति के गृह निवास आजमगढ़ से हुई सभी नियुक्तियों को भी जांच में लिया है। वर्ष 2012 में रिश्तेदारो की भर्ती के लिए कई विवाद और शिकायते पूर्व में भी की गई इसके साथ ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय को जिले के लोगो ने सिंह विश्वविद्यालय के नाम से भी पहचान बनाई थी।

यह था मामला
वर्ष 2010-2012 में भर्ती घोटाले की शिकायत विश्वविद्यालय के कांट्रेक्ट टीचर डीडी पटेल,मृदुला उपाध्याय, जीतेन्द्र मालवीय तथा मुकेश मेवारा द्वारा सतना के भाजपा सांसद गणेश सिंह तथा प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल को पत्र लिखा था,जिसके बाद इस मामले में एचआरडी समेत अन्य मंत्रालयो को पत्र लिखकर भर्ती मामले में जांच की मांग की गई थी।

रिश्तेदारो की किए थे भर्ती
विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सीडी सिंह ने वर्ष 2010 तथा 2012 में अपने ही रिश्तेदारो तथा अपने गृहग्राम अजमगढ़ के जानपहचान की भर्ती की थी जिसकी शिकायत के बाद जांच में प्रो. सीडी सिंह के साले डॉ. राकेश सिंह हिस्ट्री डिपार्टमेंट के एचओडी, डॉ. विमलेश सिंह पूर्व कुलपति के दमाद इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में असिटेंट प्रोफेसर, डॉ. प्रशांत सिंह टूरिज्म डिपाटमेंट में असिटेंट प्रोफेसर जबकि इनके पास टूरिज्म से संबंधित कोई डिग्री नही, डॉ. नीति जैन इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. नीति के पिता पूर्व कुलपति सीडी सिंह के अच्छे मित्र रहे, डॉ. आकांति रघु टूरिज्म डिपाटमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर पर आरोप लगाए गए जब इनकी नियुक्ति हुई थी तब वे इन पदो के लिए पात्र नही थे और बिना पीएचडी के इनकी भर्ती कर ली गई थी जिस मामले में पूर्व कुलपति सीडी सिंह तथा पूर्व कुलसचिव डॉ. अशोक सिंह के बीच जमकर विवाद भी हुआ था। इसके साथ ही दो असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. संजीव सिंह वर्तमान समय में यूनिवर्सिटी के परीक्षा प्रभारी तथा डॉ. अखिलेश सिंह असिटेंट रजिस्ट्रार के पास वर्तमान में प्रशासन विभाग है इनके पास भी पद के लिए योग्यता और अनुभव की कमी थी जो पूर्व कुलपति श्री सिंह के स्टूडेंट रहे।

इनका कहना है
मानव संसाधन मंत्रालय के साथ सयुंक्त टीम बनाकर दो दिनो तक कार्यवाही की गई जिसमें पूर्व कुलपति श्री सिंह ने अपने रिश्तेदारो व सगे संबंधियों के भर्ती करने की शिकायत पर जांच की गई, जिसमें जरूरी दस्तावेज जप्त कर इसकी जांच की जा रही है, जांच के बाद ही कार्यवाही की जाएगी।
मनीष सुर्ति
एसपी, सीबीआई जबलपुर

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