गोलमाल: टेलर की दुकान से स्कूल स्टेशनरी की बिक्री

Updesh Awasthee
लोकेश सोलंकी, इंदौर। खंडवा रोड पर चोखी ढाणी के सामने स्थित पोद्दार इंटरनेशनल स्कूल किताब, स्टेशनरी और यूनिफार्म का धंधा कर रहा है। हद यह है कि किताब-कॉपी बेचने के लिए स्कूल ने सामने बनी 'सुनीता टेलर" की दुकान को ही काउंटर बना दिया है। स्कूल से ही सेट बनाकर टेलर को दिए जा रहे हैं। न सिर्फ किताब-कॉपी बल्कि ब्लेजर, बेल्ट और बैच से लेकर हेयरबेल्ट तक इस दुकान से खरीदना अभिभावकों के लिए जरूरी है। स्कूल की ब्रांच शहर के ही विजय नगर से लेकर रतलाम और देवास में भी है। सभी जगह एक जैसी किताबों से लेकर एक्टिविटी किट और यूनिफॉर्म चलती है।

पांच प्रतिशत कमीशन
स्कूल की किट को सेट के रूप में बेच रहे टेलर मास्टर सत्यनारायण संगवाल से नईदुनिया प्रतिनिधि ने अलग से तीन किताबें मांगी। टेलर ने साफ मना कर दिया। उसने कहा कि स्कूल से सेट बनाकर उसे पांच-पांच के सेट दिए जाते हैं। उसका काम तो सेट ग्राहकों को देना होता है। महंगा सामान बेचे जाने पर टेलर मास्टर ने कहा कि स्कूल में बैठे अनंत सर ही रेट तय करते हैं। स्कूल उसे पांच प्रतिशत कमीशन दे रहा है।

कमीशन में भी टैक्स
टेलर मास्टर के मुताबिक हेड ऑफिस मुम्बई से सारा सामान आता है। मुझे बेचकर पूरा पैसा शाम को स्कूल में जमा करवाना होता है। जब मोटा बिल बन जाता है तब स्कूल उसका कमीशन देता है। पिछले साल बेचे गए सामान के बदले पांच प्रतिशत के हिसाब से 14 हजार रुपए कमीशन बना था। बाद में स्कूल ने मुझे 11 हजार ही दिए। बाकी पैसे प्रोफेशनल टैक्स के बदले काट लिए।

दूसरों से महंगा
स्कूल की विजय नगर व अन्य ब्रांचों के मुकाबले खंडवा रोड ब्रांच किताबों के ज्यादा दाम ले रही है। सूत्रों के मुताबिक अंदर के अधिकारियों ने यहां अपना कमीशन भी जोड़ लिया है। कक्षा दूसरी की किताब के सेट के दाम विजय नगर व अन्य ब्रांच में 3375 रुपए हैं, खंडवा रोड स्कूल से इसे 3780 रुपए में बेचा जा रहा है।

अभिभावकों के कहने पर तय की दुकान
पोद्दार स्कूल के एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर अनंत दुबे ने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्कूल से किताबें बेचने पर प्रतिबंध लगाया है, वेंडर तय करने पर नहीं। ज्यादातर अभिभावक इसी क्षेत्र के हैं, उन्हीं के कहने पर स्कूल के सामने की दुकान निर्धारित की है। ज्यादा महंगी किताब बेचने पर उन्होंने कहा कि अब इस पर मैं क्या कह सकता हूं?

ये हैं नियम
प्रशासन ने धारा-144 के तहत स्कूलों के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इसके तहत स्कूल अभिभावकों को किसी भी खास दुकान से किताब-कॉपियां, यूनिफॉर्म खरीदने पर मजबूर नहीं कर सकता। किताबें, स्टेशनरी सेट बनाकर नहीं बेची जा सकती।
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