हामिद अंसारी: इन हिन्दुओं को रोको, ये खुद को जख्मी कर लेंगे

उपदेश अवस्थी/लावारिस शहर। भारत के उपराष्ट्रपति को लेकर ये किस तरह का विलाप हो रहा है, क्या नया संविधान बन गया है। क्या देश उन फेसबुकियों के हाथ में आ गया है जिनके पास समझ नहीं है और जो समझने का प्रयास भी नहीं करते। जानकारी होती नहीं है और जुटाने की कोशिश भी नहीं करते।

यहां बात हामिद अंसारी की हो रही है। वो भारत के उपराष्ट्रपति हैं लेकिन फेसबुक पर उन्हें ऐसे लतियाया जा रहा है जैसे ना जाने कौन का गुनाह कर दिया। क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि वो मुसलमान है। क्योंकि इसके अलावा तो और कोई वजह नहीं हो सकती।

लोग आरोप लगा रहे हैं कि उपराष्ट्रपति ने सलामी नहीं दी। उन्हें जाकर बताइए, 2014 में भी नहीं दी थी, तब क्या सोए हुए थे ये तमाम फेसबुकिए देशभक्त। लो फोटो देख लो, जो भारत की सरकारी एवं एकमात्र अधिकृत बेवसाइट (http://pib.nic.in/) पर आज भी मौजूद है।

सलामी 2014: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं हामिद अंसारी दोनों ने सेल्यूट नहीं​ किया



सलामी 2015: भारत सरकार की ओर से जारी अधिकृत फोटो




अब पढ़िए क्या कहता है प्रोटोकॉल
प्रोटोकाल के तहत जब राष्ट्रगान बजता है, तब प्रमुख हस्तियों व सैन्य अफसरों को सलामी देनी होती है। गणतंत्र दिवस परेड में देश के राष्ट्रपति को बतौर सुप्रीम कमांडर सलामी लेनी होती है।  प्रोटोकाल के तहत उप राष्ट्रपति को केवल सावधान की मुद्रा में खड़े रहने की जरूरत होती है।

क्या अंसारी कभी सलामी नहीं लेते
एनसीसी कैंप में उप राष्ट्रपति प्रमुख हस्ती होते हैं और वो परेड की सलामी लेते हैं। इसी साल हुई एनसीसी की परेड में अंसारी ने भी सलामी ली थी। ये रहा फोटो:-




तो फिर मोदी और पर्रीकर ने सलामी क्यों ली
यह सवाल सोशल मीडिया पर उछाला जाना चाहिए। भारत का प्रधानमंत्री होने के बाद भी क्या मोदी को यह नहीं पता था कि प्रोटोकॉल के तहत सलामी लेने का अधिकार सिर्फ भारत के राष्ट्रपति का है। मोदी ने परेड की सलामी लेकर कहीं राष्ट्रपति पद का अपमान तो नहीं कर दिया, या फिर उनका ज्ञान कम है। उन्हें मालूम ही नहीं था कि इस समय सेल्यूट नहीं करते। पर्रीकर का क्या कहें, जब मोदी ने हाथ उठा दिया तो पर्रीकर नीचे कैसे रख सकते थे।

बुद्धिजीवियों से आग्रह
मैं भारत के उन तमाम बुद्धिजीवियों से अनुरोध करना चाहता हूं, जो कई प्रकार के शिविरों में हिन्दुओं को प्रशिक्षित करने का धर्म निभाते हैं, इन उद्दंड हिन्दुओं को हदों में रहना सिखाएं। समाज में एक ऐसी बिग्रेड भी बनाए जो उत्पाती हिन्दुओं को नियंत्रित कर सके, नहीं तो वो सारे के सारे लक्ष्य ना जाने कहां ओझल ओ जाएंगे जिसके लिए तमाम परिश्रम किया जा रहा है।

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