इंदौर। एक सिपाही ने पिछले कई सालों से पूरे डिपार्टमेंट की नाक में दम कर रखा है। डिपार्टमेंट ने पहले उसे सस्पेंड किया, फिर बर्खास्त किया बावजूद इसके वो रुका नहीं, अंतत: सीआईडी जांच के बाद उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।
मामला पुलिस विभाग में अपने ही अधिकारियों से धोखाधड़ी का है। धोखाधड़ी के मामले में सस्पेंड हुए सिपाही ने अपनी बहाली का कमांडेंट के नाम से फर्जी आदेश खुद ही निकाल दिया। दूसरे फर्जी आदेश से प्रमोशन ले लिया। तीसरे आदेश में संगठित अपराधियों की धरपकड़ में अपनी ड्यूटी लगा ली और वायरलेस सेट लेने पहुंच गया। खुलासा होने पर उसे बर्खास्त कर केस दर्ज किया गया।
यह कारनामा 15वीं बटालियन के बर्खास्त आरक्षक रईस रफीक उद्दीन कुरैशी निवासी सदर बाजार पुलिस लाइन का है। करीब छह साल पहले रईस आरक्षक के पद पर भर्ती हुआ था। 2007 में धोखाधड़ी के मामले में तत्कालीन कमांडेंट वीएन पचौरी ने उसे सस्पेंड कर दिया। अफसरों के नाम से फर्जी लेटर बनाने में माहिर रईस ने कमांडेंट के नाम से दो आदेश निकाले।
पहले में लिखा कि रईस का निलंबन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है। दूसरे में लिखा कि उसे प्रधान आरक्षक बनाने के लिए विशेष अनुमति दी जाती है। मल्हारगंज टीआई संजय दुबे के मुताबिक रईस ने 9 मई 2008 को एक और आदेश जारी किया। उसमें लिखा कि रईस की ड्यूटी प्रदेश में संगठित अपराधियों की धरपकड़ और गंभीर केसों की जांच में लगाई जाती है। शक हुआ तो जांच शुरू की गई। 2009 में डिप्टी कमांडेंट योगराज सिंह की रिपोर्ट पर उसे बर्खास्त कर दिया गया।
मुख्यालय ने जांच सीआईडी को सौंप दी। इस बीच, 2012 में रईस ने आईजी व डीआईजी को आवेदन देकर वायरलेस सेट मांगा। उसने सभी फर्जी आदेशों की कॉपी संलग्न की और दावा किया कि मुझे तत्कालीन कमांडेंट ने बहाल कर दिया था। उनके आदेश पर ही विशेष कार्य में ड्यूटी लगी हुई है। अफसरों ने बर्खास्त होने का हवाला देकर सेट देने से मना कर दिया। शुक्रवार को सीआईडी की रिपोर्ट के बाद उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया।
अफसर बनकर धमकाया भी
पुलिस के मुताबिक रईस शातिर अपराधी है। उसने पुलिस अफसर बनकर लोगों को धमकाया भी। कुछ दिन पहले सोनकच्छ में जमीन के मामले में उसने ऐसा ही किया। तब पुलिस ने उस पर केस दर्ज किया था।