शिवराज के सिपाहियों ने किया मेधा पाटकर पर हमला, दिग्विजय सिंह का साथी बताया

Sunday, August 6, 2017

shivraj ke sipahiभोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम पर सरकारी खर्च पर बनाई गई मोबाइल एप्लिकेशन का दुरुपयोग शुरू हो गया है। मोबाइल एप को डाउनलोन करने वाले अपने आप शिवराज के सिपाही घोषित हो गए और उनके पास अब वो संदेश भी आने लगे हैं जिसके लिए सारा खेल रचा गया था। शिवराज के सिपाहियों ने पहला हमला अनशन पर बैठी मेधा पाटकर पर किया है। बताया जा रहा है कि मेधा पाटकर मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की साथी है और झूठा अनशन कर रहीं हैं। ये सबकुछ तब हो रहा है जबकि सीएम शिवराज सिंह चौहान मेधा पाटकर से अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं। 

ये मैसेज वायरल किए जा रहे हैं वाट्सएप पर 
क्या आप जानते हैं पूरी दुनिया में सिर्फ मेधा पाटकर ही हैं, जो चाहे जितना अनशन करें, उनका शरीर चुस्त रहता है और वजन भी नहीं घटता। हमें यह भरोसा तब हुआ, जब दिग्विजय सिंह की सरकार में तैनात आईएएस अफसर रंजीत सिंह की किताब पढ़ी। दिग्विजय और मेधा पुराने साथी हैं और एक-दूसरे की मदद करते रहे हैं।

दिग्विजय ने अपने शासनकाल में मेधा को हाईलाइन करने के लिए भोपाल के न्यू मार्केट में अनशन करने की अनुमति दे डाली थी। पूर्व आईएएस रंजीत सिंह की किताब के मुताबिक मेधा ने भी समर्थकों की संख्या से ज्यादा बड़ा पंडाल लगाकर अनशन शुरू कर दिया। रंजीत सिंह ने स्वास्थ्य विभाग से मेधा की जांच के लिए कहा और नियमित जांच होने लगी। मेधा की सेहत पर अनशन का फर्क नहीं पड़ा। उनकी रिपोर्ट स्वस्थ्य व्यक्ति जैसी आती रही। ये कैसे संभव हुआ, ये आप बेहतर सकते हैं या मेधा ही खुद खुलासा कर सकती है, या ऊपर वाला ही ये रहस्य समझ सकता है।

क्या है शिवराज के सिपाही
'शिवराज के सिपाही' नाम से एक ऐसी फौज तैयार की जा रही है जिसका भाजपा या आरएसएस के कोई रिश्ता नहीं है। हालांकि इस फौज में भाजपा और आरएसएस के भी कई लोग शामिल हैं। इस फौज में ऐसे लोगों को चुन चुनकर शामिल किया गया है जो समाज में पकड़ रखते हैं। जिनके व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट में दोस्तों की संख्या हजारों में है और सबसे खास बात यह कि जो सरकार से किसी लाभ की उम्मीद नहीं रखते। ये लोग केवल शिवराज सिंह के लिए काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर खुलेआम शिवराज के सिपाहियों की भर्ती चल रही है। एक आॅनलाइन फार्म भी तैयार किया गया है, जिसमें आवेदक की सारी जानकारी मांगी जा रही है। फौज में अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। 

इसमें गलत क्या है
दरअसल, यह सारी प्रक्रिया सरकारी खर्च और मशीनरी का उपयोग करके शुरू की गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का मोबाइल एप सरकारी संपत्ति थी परंतु उसके डाटा का उपयोग शिवराज सिंह के लिए किया गया। इसी तरह कुछ अन्य तकनीकी सुविधाएं जिनका भुगतान सरकारी खजाने से किया गया वो मुख्यमंत्री नहीं बल्कि शिवराज सिंह के लिए उपयोग की गईं। 

पूरा नेटवर्क तैयार, कई अफसर भी शामिल
शिवराज के सिपाही के नाम से अब पूरा नेटवर्क तैयार हो चुका है। इसमें कई अफसर भी शामिल हैं। हजारों नए सिमकार्ड लिए गए हैं जो केवल 'शिवराज के सिपाही' के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। 

फायदा क्या होगा
इसके कई फायदे होंगे। पहला तो उन सभी मामलों को काउंटर किया जा सकेगा जिन्हे सरकारी स्तर पर करना मुश्किल होता है। दूसरा यदि भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता अचानक शिवराज सिंह विरोधी हो गए, जैसी की उम्मीद है तो शिवराज ​के सिपाही जमीन पर काम करेंगे। हाईकमान के सामने डाटा पेश करके साबित किया जा सकेगा कि मप्र में शिवराज सिंह विरोधी लहर नहीं है। होती तो इतने सारे लोग 'शिवराज के सिपाही' ना बनते। उन सभी प्रत्याशियों एवं भाजपा नेताओं को नुक्सान पहुंचाया जा सकेगा जिन्हे पार्टी के अनुशासन के कारण अब तक सहन किया जा रहा था। कुल मिलाकर एक तीर से कई सारे निशाने साध लिए गए हैं और शिवराज सिंह चौहान का अस्तित्व भाजपा से अलग एवं बड़ा साबित किया जा रहा है। 

सरकार नहीं कर रही ऐसा प्रचार
'शिवराज के सिपाही" ग्रुप पर किसी व्यक्ति ने यह संदेश भेजा है। यह संदेश कई वॉट्सएप ग्रुप पर चल रहा है। सरकार इस तरह का प्रचार नहीं कर रही है।
एसके मिश्रा, प्रमुख सचिव, जनसंपर्क

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