कौन सी पूजा करें कि संकट उत्पन्न ही ना हों, सिर्फ तरक्की हो

Tuesday, August 29, 2017

व्यक्ति की जैसी बुद्धि हो जातक वैसा ही समझता और करता है। यदि जातक अहंकारी हो तो बुद्धि का विकास असम्भव है। भगवान गणेश बुद्धि विवेक के देवता है। सोच समझ का सबसे बड़ा शत्रु क्रोध ही है। इसीलिये भगवान गणेश की पूजा संयम अर्थात नियम से रहना आपने आपको स्वअनुशासित करना तथा विवेक मतलब बुद्धि को दो तरफा अच्छा या बुरा क्या है वह भी भविष्य के सापेक्ष इसका निर्णय करना।

संसार के मूल ओंकार(ॐ)
जब शिव पार्वती की शादी हुई तब सबसे पहले गणपति पूजा हुई। लोग विचार करेंगे शादी के पहले संतान कैसे आ गई तो इसका जवाब यह है की जो आया है वो पहले से ही है। शिव शक्ति जो आदि तत्व है, उनका विवाह एक संकेत है और ओंकार (ॐ) जो सदैव से ही मूल तत्व है और उनका गणेशरूप मे आना प्रथम पूज्य बनना यह सब सांकेतिक तथ्य है। क्योंकि ओंकार ही परब्रम्हा है वो ही सबमें है वो ही आदि और अंत है वही खोज है तथा वही अविष्कार है।

मन पर नियंत्रण
अध्यात्म मे जातक को माया मोह से ग्रस्त माना है। सारी मोह मन के कारण ही है। चंद्रमा को  गणेश का श्राप अर्थात मन की भाग दौड़ पर नियंत्रण। जिसके कारण व्यक्ति जन्म जन्म तक चक्कर काटता है। वह भगवान गणेश की कृपा से ही नियंत्रित होता है। इसीलिये भगवान गणेश को प्रथमपूज्य तथा उनका स्मरण सर्वप्रथम बताया है।

सभी अरिष्ट का निवारण
गणेश को सभी अरिष्ट अर्थात मानसिक आर्थिक तथा भौतिक सभी समस्याओं का हल करने वाला बताया गया है। सभी प्रकार के अजीर्ण (बदहजमी) अनियमित खानपान या अनियमित खर्च के कारण ही होते है। जातक की आर्थिक स्थिति भी अनापशनाप खर्च के कारण बिगड़ती है।

राहु तथा शनि के दंड से मुक्ति
जब व्यक्ति मन द्वारा किये चोरी छिपे अपराध की सजा राहु महाराज़ की चुगलखोरी से पाता है तब यही गणेशजी (केतु) आपके पुण्य को ढाल बनाकर आपके बंधनों को काटते हैं तथा आपको रोग, ऋण, कारावास तथा सांसारिक बंधनों से मोक्ष दिलाते है।

7 अंक पर गणपति का प्रभाव
यह अंक परब्रम्हा का अंक है क्योंकि यह अंक किसी से विभाजित नही होता। दूसरा सात स्वर, सात ग्रह, सात अवस्था भी इस अंक की महता को दर्शाता है। यह अंक भगवानगणेश का अंक
 है।

गणपति अथर्वशीर्ष
भगवान गणेश परब्रम्हा ओँकार (ॐ) विद्या बुद्धि के दाता सभी संकटों को हरने वाले है। इनकी स्तुति के लिये गणपति अथर्वशीर्ष की रचना की गई है। यह वेदों मे उनके लिये की गई सबसे श्रेष्ठ आराधाना है। सभी बालकों युवाओं को यह विघ्नरहित उज्जवल जीवन के लिये इस स्त्रोत को समझना चाहिये और प्रतिदिन इसका पाठ करना चाहिये। यह आपको आसानी से सुलभ हो जायेगा किसी विद्वान के सानीध्य मे रहकर अभ्यास करने से यह आपको याद हो जायेगा तथा जीवन रूपी युद्ध मे आपके लिये कवच की तरह कार्य करेगा।
प.चंद्रशेखर नेमा "हिमांशु"
9893280184,7000460931

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