अजमेर शरीफ के दीवान ने कहा: देशद्रोही तो अलगाववादी नेता हैं

Sunday, July 2, 2017

हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा कि कश्मीर के पत्थरबाज़ देशद्रोही तो हैं, लेकिन उनसे बड़े देशद्रोही अलगाववादी नेता हैं, जो इन्हें पत्थरबाज़ी के लिए उकसाते है. उन्होंने आगे कहा कि जो आतंकवादियों को भगाने में मदद करते है उन पर नकेल कसना ज़रूरी है. खान ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि हिंसा किसी भी बात का हल नहीं हो सकती इसे सभी नेता बखूबी समझते है, पर अपने निहित स्वार्थों के लिए अलगाववादी नेताओं के सुर में सुर मिलाने लगते हैं. उन्होंने कहा कि कश्मीर के मीरवाइज जैसे नेता असल गुनहगार और देशद्रोही हैं जो कश्मीरी युवकों को भड़काकर पाकिस्तान के मंसूबों को साकार कर रहे हैं. अगर भारत सरकार ऐसे लोगों पर नकेल डाल दे तो कश्मीर समस्या का तुरंत हल संभव है.

उन्होंने कहा कि इन्हीं की शह पर आतंकवादियों ने कश्मीर में स्कूल और कॉलेज जलाए और बंद करवाए ताकि एक पूरी पीढ़ी को अनपढ़ रखा जाए और इसके ज़रिए पाकिस्तान समर्थित एजेंडे को लागू कर कश्मीर को भारत से अलग किया जा सके. ये वही नेता है जिनके अपने बच्चे विदेशों में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे है.

खान ने कहा कि कुछ राजनैतिक पार्टियां और राजनेता इस पर जमकर राजनीति कर रहे हैं जो सिर्फ अफसोसजनक ही नहीं बल्कि शर्मनाक भी है. कश्मीर के अलगाववादी नेता सही मायनों में देश के दुश्मन है जो बेरोज़गार कश्मीरी युवाओं को पत्थरबाज़ बनाकर कश्मीर को भारत से अलग करना चाह रहे है.

अलगाववादी नेताओं को भी मालूम है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है जिसे कोई अलग नहीं कर सकता फिर ये नेता ऐसे क्यों कश्मीरी युवकों को भड़का रहे है, इसका सिर्फ एक कारण है और वो कारण है जलते हुए कश्मीर में अपना खुद का एजेंडा चलाना और अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकना.

दरगाह दीवान ने कहा कि कश्मीर में ऐसे बहुत लोग हैं जो सूफ़ी मत का विस्तार चाहते हैं. संस्थागत समर्थन नहीं होने के कारण वो मजबूरन चुप रहते हैं और चरमपंथ के विस्तार का विरोध नहीं कर पाते.

इसलिए सरकारी संस्थाएं पाकिस्तान के छद्म प्रतिनिधियों और कश्मीर में चरमपंथियों से जन सहभागिता के साथ निपट सकती हैं. भारत सरकार को उग्रवाद आतंकवाद निरोधक अभियानों तथा पत्थरबाज़ों एवं राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के दमन के मामलों में किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कई खूंखार पाकिस्तानी आतंकवादियों को पकड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों और सेना ने खूब मेहनत की है लेकिन उनमें से एक भी मामले में तार्किक परिणति देखने को नहीं मिली है और किसी को भी देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में सज़ा नहीं मिली है.

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को समाज में व्यक्ति की हैसियत जाति एवं मत के आधार पर दुर्भावनाग्रस्त नहीं होना चाहिए क्योंकि सारे इंसान आदम की औलाद हैं तथा ये तथ्य सारी शंकाओं को दरकिनार करते हुए ये स्थापित करता है कि इस्लाम एक शांति का मज़हब है.

दरगाह दीवान ने कहा कि भारत में आईएसआईएस मॉडल कामयाब नहीं हो सका और ना ही होगा क्योंकि हिंदुस्तान के मुसलमान अलग स्वभाव के हैं.

हिंदुस्तानी मुसलमान धैर्यवान संवेदनशील सहिष्णु है और वो भाईचारे में विश्वास करते हैं तथा ये मुस्लिम धर्मगुरुओं की ज़िम्मेदारी है कि वो आईएसआईएस और उसके दुष्प्रचार से संबंधित भ्रांतियों को दूर करें.

साथ ही अलगाववादी जेसे देशद्रोही लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने की अपील करें और अलगाववादी एवं अन्य आतंकी संगठनो को मुँहतोड़ जवाब देकर मिसाल कायम करे.

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