रक्षाबंधन 2017 का शुभ मुहूर्त एवं नागपंचमी की सही तारीख

Sunday, July 16, 2017

भोपाल। भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन (7 अगस्त) पर इस बार भद्रा के साथ ही इस बार चंद्रग्रहण का साया भी रहेगा। ग्रहण का सूतक लगने के कारण दोपहर में 1 बजकर 52 मिनट के बाद रक्षासूत्र बांधना निषेध रहेगा। लेकिन ज्योतिषियों के मुताबिक रक्षाबंधन पर इस बार पाताल में मौजूदगी रहने के कारण राखी बांधने पर भद्रा बेअसर रहेगी। उधर नागपंचमी उदया तिथि के लिहाज से 28 जुलाई को हस्त नक्षत्र और रवि के शुभ संयोग में मनाई जाएगा।

ज्योतिष पीठ संस्थान नेहरू नगर के संचालक पं.विनोद गौतम ने बताया कि रक्षाबंधन 7 अगस्त को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 6 अगस्त को रात 9ः49 बजे से शुरू हो जाएगी, जो 7 अगस्त को रात 10ः55 बजे तक रहेगी। इस बीच 6-7 अगस्त की दरमियानी रात 2ः35 बजे से श्रवण नक्षत्र शुरू हो जाएगा। 7 अगस्त को सुबह सूर्योदय से लेकर सुबह 11ः04 मिनट तक भद्रा है लेकिन इस बार भद्रा का निवास पाताल में रहने के कारण उसका रक्षाबंधन पर असर नहीं रहेगा। लेकिन दोपहर को 1ः52 बजे से चंद्रग्रहण का सूतक प्रभावी हो जाएगा। इसलिए राखी बांधना निषेध रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. जगदीश शर्मा का भी कहना है कि पाताल में रहने के कारण इस बार भद्रा का असर राखी बांधने में नहीं रहेगा।

क्या होगा शुभ मुहुर्त
पं.विनोद गौतम के मुताबिक पूर्णिमा के साथ श्रवण नक्षत्र रहने के कारण 7 अगस्त का ब्रह्म मुहुर्त में श्रावणी उपाकर्म करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा। इसके अतिरिक्त राखी बांधने के लिए 7 अगस्त को सुबह 9ः53 से सुबह 10ः30 बजे तक और अभिजीत मुहुर्त में सुबह 11ः45 से दोपहर 12ः45 बजे तक शुभ मुहुर्त है।

28 को मनेगी नाग पंचमी
पं.जगदीश शर्मा ने बताया कि इस बार पंचमी 27 जुलाई को सुबह 9ः27 बजे से शुरू होकर 28 जुलाई को सुबह 9ः03 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के कारण नागपंचमी 28 जुलाई को हस्त नक्षत्र और रवियोग में मनाई जाएगी। इस दौरान भगवान शिव की आराधना करने से कालसर्प योग,पितृ दोष,चांडाल योग,मंगल दोष आदि का निवारण हो जाता है।

रात 12ः49 बजे होगा ग्रहण का मोक्ष
पं.गौतम के मुताबिक चंद्र ग्रहण का सूतक 7 अगस्त को दोपहर 1ः52 बजे से लगेगा। रात 10ः54 बजे ग्रहण का स्पर्श होगा। रात 11ः52 बजे मध्य में होगा। रात 12ः49 बजे मोक्ष होगा। ग्रहण काल में देव प्रतिमाओं का स्पर्श नहीं करना चाहिए। किसी तरह का हवन आदि नहीं करना चाहिए। इस दौरान सिर्फ मानसिक संकीर्तन करते रहना चाहिए। ग्रहण की समाप्ति के बाद स्नान,दान,पूजन करना चाहिए।

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