आपके BANK ACCOUNT को BLOCK होने से बचाने के लिए लास्ट चांस

Wednesday, April 12, 2017

नई दिल्ली। आपका बैंक अकाउंट ब्लॉक हो सकता है। यदि आप इस झंझट से बचना चाहते हैं तो आपके पास अब केवल आखरी मौका है। 30 अप्रैल से पहले तक आपको अपने बैंक खातों का सेल्फ सर्टिफिकेशन करना होगा। नहीं तो ये खाते ब्लॉक भी हो सकते हैं। इस संबंध में आयकर विभाग का आदेश एफएटीसीए (विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम) के प्रावधानों के तहत सामने आया है। आयकर विभाग का कहना है कि इसके बिना इन सभी खातों को अवरुद्ध किया जा सकता है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड या सीबीडीटी ने एक बयान में कहा, “खाताधारकों को सूचित किया जा सकता है, अगर उन्होंने 30 अप्रैल 2017 तक अपने खातों को सेल्फ सर्टिफाइड (स्वयं-प्रमाणित) नहीं किया है। इन खातों को ब्लॉक किया जा सकता है, जिसका मतलब होगा ऐसे बैंक खाता धारक अपने खातों से किसी प्रकार का वित्तीय लेन-देन नहीं कर पाएंगे।

जानिए इससे जुड़ी 10 बड़ी बातें....
एफएटीसीए भारत और अमेरिका के बीच वित्तीय जानकारी के स्वत: आदान-प्रदान की अनुमति देता है।
भारत ने विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम (एफएटीसीए) के कार्यान्वयन के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक समझौता किया था, जो कि 31 अगस्त 2015 से अमल में आ चुका है।
निवेशकों को तमाम डिटेल उपलब्ध करवाने की जरूरत होगी जैसे कि किसी देश के निवासी होने का प्रमाण, टैक्स पहचान नंबर, जिस देश में जन्म लिया है उसका नाम, देश की नागरिकता इत्यादि।
अगर सेल्फ सर्टिफिकेशन (स्व-प्रमाणीकरण) न होने के कारण खातों को ब्लॉक किया जाता है, तो ऐसे खातों से खाताधारक द्वारा लेन-देन की अनुमति तभी दी जाएगी, जब एक बार खाते का सेल्फ सर्टिफिकेशन हो जाएगा।
इससे पहले वित्तीय संस्थानों को 31 अगस्त 2016 तक खाताधारकों (1 जुलाई 2014 से 31 अगस्त 2015 तक खोले गए सभी व्यक्तिगत और इकाई खातों) से सेल्फ सर्टिफिकेशन प्राप्त करना पड़ा था।
म्युचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थानों ने ग्राहकों को नए मानदंडों का पालन करने के लिए कहा था।
हितधारकों की मुश्किलों को देखते हुए, कर विभाग ने 31 अगस्त 2016 तक के सेल्फ सर्टिफिकेशन के मानकों का पालन करने की समय सीमा बढ़ा दी थी।
वित्तीय संस्थानों को सलाह दी गई थी कि आवश्यक दिशानिर्देशों को पूरा करने पर काम करना जारी रखे, जिसमें सेल्फ सर्टिफिकेशन भी शामिल है।
एफएटीसीए का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यक्ति अपनी उस आय में से भी टैक्स का भुगतान करे जिसे उसने बाहर किसी देश में रखे धन से अर्जित किया है।
एफएटीसीए ऐसे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ऐसे नागरिकों के बारे में इस तरह की जानकारी रिपोर्ट करने के लिए बाध्य करता है जिनके वो खाताधारक हैं।

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