भोपाल, 15 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के औद्योगिक, शैक्षणिक, बुनियादी ढांचे और कृषि विकास से जुड़े कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। इन निर्णयों का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
1. जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक (इंडस्ट्रियल) कॉरिडोर
कॉरिडोर की घोषणा: महाकौशल, मध्य भारत और मालवा क्षेत्र के विकास के लिए जबलपुर से भोपाल और देवास के रास्ते इंदौर तक 'इंडस्ट्रियल इकोनॉमिक कॉरिडोर' की घोषणा की गई है। इस कॉरिडोर के त्वरित विकास के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अंतर्गत ₹100 करोड़ की अंश पूंजी से राज्य स्वामित्व वाली कंपनी गठित की गई है। तेजी से अंतर-विभागीय फैसलों के लिए इस कंपनी की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री करेंगे। प्रथम चरण में 3 से 5 प्राथमिक हब बनाए जाएंगे, जिसके लिए 10,000 एकड़ तक की भूमि चिन्हित की जाएगी। शुरुआती चरण में मुख्य फोकस जबलपुर-नरसिंहपुर-रायसेन-भोपाल बेल्ट पर रहेगा।
निवेश एवं रोजगार के लक्ष्य:
मार्च 2028 तक (1-1.25 वर्ष में): ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश और 3 लाख लोगों को रोजगार (1 लाख प्रत्यक्ष तथा 2 लाख अप्रत्यक्ष) प्रदान करने का लक्ष्य है।
3 वर्षों में (पूर्ण विकास पर): ₹3 लाख करोड़ से अधिक का निवेश और 6 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं बनेंगी।
एकीकृत टाउनशिप विकास: इसमें केवल सड़कें नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल टाउनशिप, श्रमिक आवास, स्कूल, अस्पताल, कौशल केंद्र और हरित क्षेत्रों का समग्र विकास शामिल है।
क्षेत्रवार औद्योगिक संभावनाएं:
जबलपुर: पर्यटन, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा उत्पादन, माइनिंग, लॉजिस्टिक्स और फर्नीचर क्लस्टर।
नरसिंहपुर एवं रायसेन: फूड प्रोसेसिंग, फूड पार्क और वेयरहाउसिंग।
भोपाल: आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, नॉलेज सर्विसेज और टूरिज्म। (भोपाल टूरिज्म कॉन्क्लेव में 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लगभग ₹5,45,000 करोड़ के निवेश अवसर सामने आए)।
इंदौर-देवास-उज्जैन-सीहोर: फूड प्रोसेसिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और आईटी सर्विसेज।
2. स्कूली शिक्षा व अवसंरचना विकास
सांदीपनि विद्यालय परिवहन योजना: सांदीपनि (पीएमश्री) विद्यालयों में बस संचालन व दर निर्धारण का अधिकार जिला कलेक्टर्स को सौंपा गया है। इसके लिए ₹241 करोड़ की योजना मंजूर की गई है ताकि जनजातीय व दूरस्थ क्षेत्रों में बस सुविधाएं सुचारू रहें।
स्कूल व छात्रावास बुनियादी ढांचा: राज्य के स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों, आवासीय परिसरों और खेलकूद भवनों के कायाकल्प व निर्माण के लिए ₹3,000 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे अगले 2 वर्षों में कोई भी विद्यालय जर्जर स्थिति में न रहे।
3. प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता
चित्रंगी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना (सिंगरौली): ₹1,320 करोड़ की 5-वर्षीय योजना की निरंतरता को मंजूरी दी गई।
कयामपुर-सीतामऊ दाब परियोजना: ₹750 करोड़ की परियोजना की निरंतरता को स्वीकृति मिली।
बारना सिंचाई परियोजना (रायसेन): उदयपुरा, भोजपुर, सांची और सिलवानी क्षेत्रों के लिए अगले 5 वर्षों हेतु स्वीकृति जारी रहेगी।
झिरमरी सिंचाई परियोजना: बुरहानपुर एवं नेपानगर क्षेत्रों को लाभान्वित करने वाली इस परियोजना की निरंतरता स्वीकृत हुई।
4. स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन
आयुष मिशन को स्वीकृति: राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत ₹1,698 करोड़ (₹1,697.8 करोड़) की योजना की निरंतरता मंजूर की गई है।
आयुर्वेदिक कॉलेजों का विस्तार: स्वतंत्रता पूर्व से राज्य में केवल 7 सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज थे, जबकि पिछले ढाई वर्षों में 9 नए आयुर्वेदिक कॉलेजों की स्वीकृति व भूमि पूजन कर उन्हें शुरू करने की दिशा में कार्य किया गया है।
5. नए जिलों में नए कार्यालय
नए गठित जिलों (निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर) में महिला एवं बाल विकास विभाग के नए कार्यालय खोलने की मंजूरी दी गई है।
6. बिजली प्रबंधन एवं कृषि राहत
विद्युत आपूर्ति प्रबंधन: धान की रोपाई व बारिश के बाद बढ़ी बिजली मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने सरदार सरोवर (गुजरात) से 800 मेगावाट बिजली ली है, साथ ही उत्तर प्रदेश और पंजाब से भी बिजली समन्वय बनाकर स्थिति नियंत्रित की है।
सोयाबीन व भावांतर योजना: सोयाबीन पर भावांतर योजना लागू की गई थी, लेकिन वर्तमान में खुले बाजार में किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।

