भोपाल, 2 अक्टूबर 2026: यह दिन भी देखना बाकी रह गया था। एमपी नगर में डीबी मॉल के सामने सरकारी इलेक्ट्रिक पोल में करंट के कारण भाजपा के युवा नेता की मौत हो गई। नगर निगम ने एक असिस्टेंट इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया, और भाजपा के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि न्याय हो गया। कानून की किताब और व्यवस्था की दलीलों को उठाकर देखिए, निलंबन का मतलब न्याय नहीं होता। इस मामले में जब तक पहले जिम्मेदार कर्मचारी से लेकर अंतिम जिम्मेदार अधिकारी तक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज नहीं हो जाता है, न्याय का प्रारंभ तक नहीं कहा जा सकता।
कमिश्नर ने बड़ी चतुराई के साथ AE को सस्पेंड किया ताकि हाईकोर्ट से बहाल हो जाए
मामला भोपाल में भाजपा के युवा नेता एवं अधिवक्ता स्वर्गीय श्री दिव्यऋषि तिवारी की अकाल मृत्यु का है। एमपी नगर जैसे व्यस्ततम क्षेत्र में, डीबी मॉल के ठीक सामने, जहां से हर घंटे हजारों लोग गुजर रहे हैं, इलेक्ट्रिक पोल में करंट आ रहा था। इस करंट के कारण श्री तिवारी की मौत हो गई। इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। केवल कार्रवाई के निर्देश हुए थे और आज नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन ने अस्सिटेंट इंजीनियर श्री सुमित सिंह को कर्तव्य में लापरवाही एवं उदासीनता के कारण सस्पेंड कर दिया है। मतलब बस सस्पेंड कर दिया है। आदेश में श्री सिंह के खिलाफ किसी विभागीय जांच शुरू करने की बात नहीं कही गई है और ना ही श्री सिंह को सस्पेंड करने से पहले कोई नोटिस दिया गया था। मतलब निलंबन की कार्रवाई, एक तरफ हुई है जिसे हाई कोर्ट में चुनौती देकर खत्म करवाया जा सकता है।
पुलिस को अभी तक जिम्मेदार व्यक्ति ज्ञात नहीं हुआ
घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR का मतलब है मामले को रफा दफा करने की शुरुआत। कलेक्टर की टीम ने जांच करके जिम्मेदार व्यक्ति का पता लगा लिया है लेकिन पुलिस को अभी तक अज्ञात व्यक्ति का पता नहीं लगा है। मतलब समझ में नहीं आ रहा है कि कलेक्टर की टीम ने जिस व्यक्ति को पहचान लिया है, पुलिस उसको क्यों नहीं पहचान पा रही है?
काश दिव्यऋषि अनुसूचित होते
एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी, और बात खत्म हो गई है। सब कुछ इसलिए हो रहा है क्योंकि दिव्यऋषि तिवारी एक ब्राह्मण थे। काश वह अनुसूचित जाति के होते, तो उनको अपने समाज का, अपनी जाति के नेताओं का पूरा समर्थन मिल रहा होता।, तो आज घटनास्थल पर रोड ब्लॉक हुए 48 घंटे से ज्यादा का समय हो चुका होता और अज्ञात व्यक्ति की पहचान करना तो छोटी बात, संबंधित अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज हो गया होता और उसको गिरफ्तार भी कर लिया गया होता। काश! दिव्यऋषि अनुसूचित होता।

