भोपाल, 25 सितंबर 2026: जहांगीराबाद थाने के निलंबित थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार के खिलाफ एक और विभागीय कार्रवाई का ग्राउंड तैयार हो गया है और डीजीपी का सम्मान बचाए रखने के लिए डिपार्टमेंट को यह कार्रवाई करनी ही होगी। इस समाचार में हम आपको यह भी बताएंगे कि क्या एक निलंबित कर्मचारी, निलंबन अवधि के दौरान, शासकीय सेवक के लिए निर्धारित आचरण नियमों से मुक्त हो जाता है। क्या वह अपने वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ इस प्रकार का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सकता है जैसा की इंस्पेक्टर राजन सिंह अहिरवार ने किया।
वीडियो हटाने से कर्मचारी आरोप मुक्त नहीं होता
भोपाल के जहांगीराबाद थाने के निलंबित थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार ने सोशल मीडिया अकाउंट (फेसबुक और इंस्टाग्राम) से अपना विवादित वीडियो हटा दिया है, लेकिन यह वीडियो सोशल मीडिया पर अभी भी वायरल हो रहा है क्योंकि इस वीडियो के आधार पर भोपाल के लगभग सभी समाचार संस्थाओं ने न्यूज़ बनाई और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सोशल मीडिया हैंडल्स पर यह वीडियो मौजूद है। अपने अकाउंट से वीडियो हटा देने से, वीडियो पोस्ट करने के प्रति जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती है।
राजन सिंह के वीडियो में क्या है
वीडियो में राजन अहिरवार ने अपनी वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी पर उन्हें प्रताड़ित करने सहित कई आरोप लगाए थे। यहां तक क्या था कि, संबंधित महिला अधिकारी से पूरा डिपार्टमेंट परेशान है, एवं उन्होंने ही अधिकारियों को मिस गाइड किया। साथ ही उन्होंने अपने निलंबन को लेकर भी बयान दिया था। वीडियो में उन्होंने कहा था कि वे गलत काम के लिए निलंबित नहीं हुए हैं और न ही किसी आपराधिक मामले में कार्रवाई हुई है।
वीडियो के कारण राजन सिंह के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?
अब सवाल उठता है कि, राजन सिंह एक निलंबित पुलिस अधिकारी हैं। ऐसी स्थिति में क्या वीडियो के आधार पर उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई हो सकती है। जवाब है, हां। न केवल हो सकती है बल्कि होनी चाहिए। मध्य प्रदेश के सरकारी सिस्टम में निलंबन, निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया में एक व्यवस्था है। यह किसी प्रकार का दंड नहीं है और ना ही राजन सिंह की सेवाएं समाप्त की गई हैं। निलंबन के बाद भी वह पुलिस विभाग के कर्मचारी हैं। इसलिए मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 उस पर लागू रहते हैं। नियम 3(1) स्पष्ट कहता है कि, प्रत्येक सरकारी सेवक हर समय:पूर्ण सत्यनिष्ठा बनाए रखे, कर्तव्य के प्रति समर्पण रखे, और ऐसा कुछ न करे जो सरकारी सेवक के लिए अनुचित (unbecoming) हो।
“हर समय” में निलंबन की अवधि भी शामिल है। निलंबन के दौरान किया गया कदाचार अलग आरोप बन सकता है।
वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ वीडियो के कारण राजन सिंह के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?
मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के अनुसार:
- नियम 3 - अनुचित आचरण निषिद्ध।
- नियम 9 - प्रेस/मीडिया से संबंध पर प्रतिबंध (पूर्व अनुमति के बिना, 2. यहां मीडिया का अर्थ सोशल मीडिया भी है)।
- नियम 10 - सरकार की आलोचना निषिद्ध।
कोई सरकारी सेवक रेडियो/अन्य मीडिया, दस्तावेज, प्रेस को संचार या सार्वजनिक कथन में ऐसा बयान नहीं दे सकता जिससे केंद्र/राज्य सरकार की वर्तमान या हालिया नीति/कार्रवाई की प्रतिकूल आलोचना हो।
सोशल मीडिया सार्वजनिक मंच है। वरिष्ठ अधिकारी, विभाग के कामकाज या शासन के फैसलों के खिलाफ पोस्ट नियम 3 और नियम 10 के दायरे में आ सकती है, खासकर अगर वह: अपमानजनक, अभद्र या अनुशासन तोड़ने वाली हो, विभाग/सरकार की छवि खराब करे, सेवा संबंधी शिकायत को सार्वजनिक मंच पर उठाए (जबकि उचित माध्यम वरिष्ठ अधिकारी/विभाग है)।
निलंबन किसी नए कदाचार से छूट नहीं देता। सक्षम प्राधिकारी कारण बताओ नोटिस, आरोप-पत्र, विभागीय जांच और उसके बाद छोटी/बड़ी शास्ति (परिनिंदा से सेवा से हटाने तक) की प्रक्रिया चला सकता है।
डीजीपी के सम्मान के लिए डिपार्टमेंट को कार्रवाई करनी होगी
अब एक व्यावहारिक पक्ष भी आता है। कुछ दिन पहले ही मध्य प्रदेश पुलिस की न्यू सोशल मीडिया गाइडलाइन जारी की गई है। जिसमें स्पष्ट लिखा गया है कि सरकारी या निजी अकाउंट से विभाग के कामकाज पर टिप्पणी तथा वरिष्ठ अधिकारियों/सहकर्मियों के खिलाफ ऐसी टिप्पणी न की जाए जो पद की गरिमा के विपरीत हो।उल्लंघन पर पुलिस रेगुलेशन और सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (विधि सलाहकार एवं पत्रकार)।

