भोपाल समाचार, 27 सितंबर 2026: जमाना बदल गया है। पहले तृतीया और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी, अधिकारियों की अत्याचार को अपना भाग्य समझकर सहन कर लेते थे और रिटायरमेंट के बाद सब कुछ ऐसे भूल जाते थे जैसे पुनर्जन्म हो गया हो, लेकिन अब ऐसा नहीं होता। एक कर्मचारी ने रिटायर होने के बाद सबसे पहले तो अपने रुके हुए इंक्रीमेंट वसूल किए और फिर उसके साथ भेदभाव करने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के तीन रिटायर्ड अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल केस की पिटीशन फाइल कर दी। यहां उल्लेख करना जरूरी है कि, सुप्रीम कोर्ट अपने लैंडमार्क जजमेंट में स्पष्ट कर चुका है कि, रिटायर हो जाने से अधिकारी द्वारा सेवा के दौरान किए गए कार्यों के प्रति लीगल लायबिलिटी खत्म नहीं होती।
जानकारी के अनुसार विजयपुरम कॉलोनी, शिवपुरी निवासी सरकारी कर्मचारी महेंद्र कुमार दुबे अगस्त 2016 में मत्स्य विभाग से सहायक संचालक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके अनुसार नौकरी के दौरान विभागीय लक्ष्य पूरे नहीं होने का हवाला देकर उनके दो इंक्रीमेंट रोक दिए गए थे। दुबे का दावा है कि इसी कार्रवाई से प्रभावित अन्य कर्मचारियों के मामलों में बाद में रोक हटा दी गई और उन्हें इंक्रीमेंट का लाभ दे दिया गया, लेकिन उनके मामले में ऐसा नहीं किया गया। दुबे ने इसे अपने साथ भेदभाव बताते हुए हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की। खास बात यह रही कि उन्होंने मामले में खुद पैरवी की। उनके अनुसार हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए रोके गए दोनों इंक्रीमेंट का लाभ देने के आदेश दिए।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक परिवाद
हाईकोर्ट से अपने पक्ष में फैसला आने के बाद दुबे ने अब संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए शिवपुरी सीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल किया है। परिवाद में तीन सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। इनमें भोपाल निवासी वीणा धाणेकर, सलीना सिंह और उपेंद्र कुमार पुरोहित शामिल हैं।
वीणा धाणेकर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी होने के साथ वर्तमान में सपाक्स पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। महेंद्र कुमार दुबे भी सपाक्स से जुड़े हैं और वर्तमान में पार्टी के जिला संयोजक बताए गए हैं। सलीना सिंह मत्स्य विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेट्री रह चुकी हैं, जबकि उपेंद्र कुमार पुरोहित भी आईएएस कैडर से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।
विभाग ने ओआईसी नियुक्त की
मामला आपराधिक परिवाद के रूप में अदालत में पहुंचने के बाद मत्स्य विभाग ने तीनों अधिकारियों की ओर से प्रकरण में पैरवी के लिए शिवपुरी की असिस्टेंट डायरेक्टर को ओआईसी नियुक्त किया है। वहीं, परिवाद में व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाए गए अधिकारियों को अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता नियुक्त करना होगा। दुबे की ओर से दाखिल परिवाद अब हाईकोर्ट में इंक्रीमेंट की लड़ाई जीतने के बाद शुरू हुई अगली कानूनी लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी अदालत ने परिवाद को रजिस्टर्ड कर उस पर कोई आदेश पारित नहीं किया है।

