उज्जैन, 27 सितंबर 2026: भारतीय काल गणना (कैलेंडर) के अनुसार आज, सिद्धार्थी विक्रम संवत 2013, भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि, दिन रविवार है। भारतीय वैदिक परंपरा के अनुसार पितृपक्ष पूर्णिमा के बाद आज पहला दिन है। आज ही के दिन डॉ मोहन यादव (जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं) ने सिंहस्थ 2028 के लिए अपना पैतृक घर समर्पित कर दिया। उन्होंने वैदिक परंपरा के अनुसार, पूजा अर्चना करने के बाद स्वयं गैंती चला कर अपने पैतृक घर के उस हिस्से को अपने आधिपत्य से मुक्त कर दिया, जो सिंहस्थ 2018 के मार्ग के विस्तार हेतु प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री ने परियोजना नहीं बदली, पैतृक घर समर्पित कर दिया
बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अपना पैतृक मकान भी सिंहस्थ 2028 परियोजना की निर्धारित सीमा में आ रहा है। शायद आपको याद होगा कुछ समय पहले कांग्रेस पार्टी के नेताओं और राजनीति के कुछ विद्वानों ने बड़ा हंगामा मचाया था कि डॉ मोहन यादव ने, मुख्यमंत्री के पद का दुरुपयोग करते हुए परियोजना में परिवर्तन किए। तब डॉक्टर मोहन यादव ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया था लेकिन आज जब उन्होंने अपना पैतृक घर समर्पित किया, तो सबको जवाब मिल गया।
"त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।
गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर॥"
अर्थ: हे गोविंद! आपकी दी हुई वस्तु ही मैं आपको समर्पित कर रहा/रही हूँ। कृपया मेरे सामने प्रकट होकर इसे ग्रहण करें और मुझ पर प्रसन्न हों।
उन्होंने अपने घर पर कुदाल चलाकर यह संदेश दिया है कि विकास योजना का असर व्यक्तिगत संपत्ति तक भी पहुंचा है। सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में उनके परिवार की संपत्ति भी उसी प्रशासनिक प्रक्रिया के दायरे में है, जो अन्य प्रभावित भवनों पर लागू है। सीएम डॉ. यादव ने दशकों पुरानी पारिवारिक यादों से जुड़े घर के बावजूद सिंहस्थ के लिए जरूरी शहरी बदलाव को सार्वजनिक हित के रूप में देखा। पैतृक मकान का प्रभावित होना उस बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसके तहत सिंहस्थ-2028 से पहले पुराने उज्जैन की सड़क, यातायात और शहरी अधोसंरचना को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
भावुक हो गए मोहन: जिस घर में बड़े हुए, खेले-कूदे...
इस अवसर पर प्रदेश के मुखिया डॉ. यादव भावुक नजर आए। उनका कहना है कि जहां जन्म हुआ हो, उस घर को तोड़ना पड़े तो मन पर असर होता है। लेकिन, विकास के लिए यह बलिदान दिया जाना चाहिए। सीएम डॉ. यादव 27 सितंबर को अपने पुश्तैनी घर पहुंचे। उन्होंने यहां अपने पैतृक घर के बाहर पूजा-अर्चना की और फिर गैंती लेकर विकास की नई नींव रखी। उन्होंने कहा कि जिस घर में छोटे से बड़े हुए हों, खेले-कूदे हों, उसको तोड़ना पड़े तो मन पर प्रभाव होना स्वाभाविक है। अगर सिंहस्थ के लिए जरूरी है तो हमें यह बलिदान देना ही चाहिए। हम सब मिलकर वो कर रहे हैं। पूरा देश इस बात को देख रहे हैं कि लोग अपने मकान को आनंद से तोड़ रहे हैं। ताकि, दूसरों को मदद मिले।
उज्जैन ने पेश किया उदाहरण, यही उज्जैन का आदर्श है
डॉ मोहन यादव ने कहा कि हम उज्जैन के लोगों ने अपना मकान खुद पीछे हटाया, ये आदर्श उदाहरण है। उज्जैन की आबादी 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ लोगों के आने का सत्कार करना है। इसलिए हम सबने योगदान दिया। मैं अपनी सरकार को भी धन्यवाद देता हूं। जिसने बिना भेदभाव के चाहे वो हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, पारसी, सबने अपने देवस्थान तक पीछे किए। इससे सरकार पर विश्वास बनता है।। यही उज्जैन का आदर्श है, इसी से सरकार पर भरोसा बनता है।
डॉ मोहन यादव का घर तोड़कर सड़क बनाई जाएगी
उल्लेखनीय है कि उज्जैन की खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक लगभग 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किए जाने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है। मार्ग चौड़ीकरण एवं विकास कार्य के लिए राज्य शासन द्वारा प्रदत्त लगभग 9.80 करोड़ रुपए की राशि व्यय की जाएगी। यह मार्ग शहर के महत्वपूर्ण एवं व्यस्त संपर्क मार्गों में शामिल है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं एवं वाहनों की संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए मार्ग का चौड़ीकरण यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
ऐसे कामों की प्रेरणा नरेंद्र से मिलती है: मोहन ने बताया
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जब मैं पहली बार साइंस कॉलेज से चुनाव जीतकर आया, तब जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव लड़ा, फिर प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा और उसके बाद भी जब-जब चुनाव लड़ा, हर चुनाव में मेरे सामने एक बात रही। आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए हमें अपने आचरण और कार्यों से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दृष्टि से एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं। वे व्यक्तिगत हितों से परे रहकर नियम, कानून और सुशासन के लिए आवश्यक सभी विषयों को प्राथमिकता देते हैं। उनके सार्वजनिक जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।




