आज हम आपको श्री नर्मदा मैया की पावन गोद में बिराजमान ऋद्धनाथ महादेव की वह दिव्य कथा सुनाते हैं, जिसे सुनकर मन आनन्द से भर जाता है। (ऋद्धनाथ का शाब्दिक अर्थ होता है "समृद्धि, अलौकिक शक्तियों या संपत्ति के स्वामी") मध्यप्रदेश के हरदा जिले में, जहाँ नर्मदा मैया अपनी कल-कल ध्वनि से शिव-नाम का संकीर्तन करती हैं, वहीं हण्डिया नाम के परम पुनीत धाम में यह प्राचीन शिवालय स्थित है।
बात बहुत पुरानी है, जब दशानन रावण ने अपने ही भाई कुबेर का सारा धन-ऐश्वर्य और सुख-सम्पत्ति छीन ली थी। तब बेचारे कुबेर देव बड़े दुखी हुए। तब सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी और माता पार्वती ने उन्हें राह दिखाई और कहा- "हे कुबेर! तुम नर्मदा के दक्षिण तट पर जाकर आशुतोष भगवान भोलेनाथ की शरण लो"। ब्रह्मा जी की आज्ञा पाकर कुबेर देव, नर्मदा के इस सुंदर तट पर आए और घोर तपस्या में लीन हो गए। उनकी निष्काम भक्ति देख भोले बाबा रीझ गए और प्रकट होकर बोले- "वर माँगो कुबेर!" महादेव की कृपा से कुबेर को न केवल अपनी खोई हुई सम्पदा मिली, बल्कि महादेव ने उन्हें धरती पर हीरों की खान भी दे दी, जिसे आज हम हीरापुर गाँव के नाम से जानते हैं।
अपने लाड़ले शिव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए कुबेर देव ने यहाँ एक दिव्य मन्दिर का निर्माण करवाया। इस मन्दिर की छवि बड़ी ही निराली है! यह मन्दिर किसी गोल या चौकोर आकार का नहीं, बल्कि कछुए (कच्छप) के आकार का बना है, क्योंकि कछुए को साक्षात लक्ष्मी और धन-सम्पत्ति का प्रतीक माना जाता है। मन्दिर के शिखर की महिमा तो देखो, यहाँ एक नहीं बल्कि 12 कलश जगमगाते हैं। कहते हैं कि इन कलशों के दर्शन मात्र से प्राणी को बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का फल मिल जाता है।
यहाँ एक बड़ी अनूठी बात है! इस मन्दिर में माँ पार्वती शिव जी के संग बिराजमान नहीं हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि यहाँ माता पार्वती, माँ लक्ष्मी के रूप में भगवान विष्णु के संग रहती हैं, इसलिए महादेव यहाँ अकेले ही भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इसी स्थान पर विघ्नहर्ता गणेश जी ने भी बड़ी कठिन तपस्या की थी।
मंदिर के पास ही नर्मदा जी का 'नाभि कुण्ड' है, जो पूरी नर्मदा मैया का मध्य केंद्र माना जाता है। यहाँ की ऐसी महिमा है कि जो कोई भक्त पहले नाभि कुण्ड में स्नान करता है और फिर नर्मदा जल से ऋद्धनाथ महादेव का अभिषेक करता है, उसके जीवन के सारे रोग-शोक मिट जाते हैं और शरीर में दिव्य सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। तो प्रेम से कहिये... ऋद्धनाथ महादेव की जय! नर्मदा मैया की जय!
प्रस्तुति: श्यामला ज्योतिष पीठ, भोपाल।

