भोपाल, 18 अगस्त 2026: लोगों ने कहा था कि मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना एक चुनावी स्कीम है, 2023 में विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही बंद हो जाएगी। फिर बोले 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद बंद हो जाएगी। फिर बोले कि शिवराज सिंह ने प्रदेश को बर्बाद करने वाली स्कीम लांच कर दी है, मोहन यादव कंटिन्यू नहीं कर पाएंगे लेकिन आज की कैबिनेट मीटिंग में CM डॉ मोहन ने लाडली बहनों के लिए सवा लाख करोड़ का प्रावधान कर दिया है। मतलब किसी भी बहन को चिंता करने की जरूरत नहीं है, अगले चुनाव के बाद भी 2031 तक मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना चलती रहेगी और इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी।
2031 तक निरंतर जारी रहेगी योजना
मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार, यह विशाल धनराशि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए स्वीकृत की गई है। इस निर्णय का उद्देश्य प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को सुनिश्चित करना, उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर में निरंतर सुधार लाना तथा परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करना है।
1.27 करोड़ बहनों को मिल रहा है सीधा लाभ
वर्तमान में प्रदेश की लगभग 1.27 करोड़ महिलाएं इस योजना के तहत लाभान्वित हो रही हैं। योजना के प्रावधानों के तहत, प्रत्येक पात्र महिला के डीबीटी (DBT) सक्रिय खाते में हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे हस्तांतरित की जा रही है। सरकार के इस ताजा फैसले से करोड़ों बहनों को आगामी 5 वर्षों तक बिना किसी रुकावट के आर्थिक संबल मिलता रहेगा।
महिला कल्याण के लिए समग्र दृष्टिकोण
कैबिनेट ने केवल लाड़ली बहना योजना ही नहीं, बल्कि महिला और बाल विकास से जुड़ी अन्य प्रमुख योजनाओं के लिए भी खजाना खोला है:
मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना: इसके निरंतर संचालन के लिए 16,326.47 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे अब तक 50.99 लाख बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: इसके क्रियान्वयन के लिए 2,137.65 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को नकद प्रोत्साहन देना और बालिका जन्म को बढ़ावा देना है।
सर्वांगीण विकास के लिए ₹1.46 लाख करोड़ का रोडमैप
मंत्रिपरिषद की इस बैठक में प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कुल मिलाकर लगभग 1.46 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई। इसमें महिला सशक्तिकरण के अलावा स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए ₹11,835.35 करोड़ और कृषि अनुसंधान के लिए ₹870.16 करोड़ की राशि भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन निर्णयों के माध्यम से स्पष्ट किया है कि सरकार महिलाओं के सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

