भोपाल, 9 अगस्त 2026: राज्य के सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों और उनके हितों के संरक्षण के लिए 'राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकार संरक्षण संघ' ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल आगामी सोमवार, 10 अगस्त 2026 को राज्य मंत्रालय में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला से मुलाकात करेगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उनका निराकरण करवाना है।
नौकरशाही के रवैये पर नाराजगी संघ के संरक्षक श्री शील प्रताप सिंह पुंडीर और प्रदेशाध्यक्ष व्यास मुनि चौबे ने एक संयुक्त बयान में नौकरशाही के प्रति कड़ा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरशाही के संवेदनहीन रवैये के कारण तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शोषण का शिकार हो रहे हैं। संघ का कहना है कि सरकार के पास अदालतों के कई आदेश लंबित हैं, लेकिन लापरवाह अधिकारी केवल 'अवमानना' के डर से ही कुछ मामलों में राहत देते हैं, अन्यथा सरकारी खर्च पर अपील दर अपील की जाती है।
प्रमुख मांगें और मुद्दे: संघ द्वारा इस मुलाकात के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी:
70-80-90% वेतन का विरोध: पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लागू किए गए स्टाइपेंड नियमों (परिवीक्षा अवधि में पूर्ण वेतन के स्थान पर केवल 70, 80 और 90 प्रतिशत भुगतान) को संघ ने 'आर्थिक शोषण' करार दिया है। उच्च न्यायालय द्वारा इन नियमों को खारिज किए जाने के बावजूद इसी आधार पर भुगतान करना कर्मचारी विरोधी बताया गया है।
सीपीसीटी (CPCT) की अनिवार्यता: चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में पदोन्नति के लिए सीपीसीटी की शर्त को अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक बताया गया है। संघ का कहना है कि सेवा नियमों में इसका कोई उल्लेख नहीं है, फिर भी इसे थोपा जा रहा है। साथ ही, सीधी भर्ती वाले लिपिकों की सेवा समाप्ति से जुड़ी शोषणकारी शर्त (कंडिका 6.5) को हटाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जाएगी।
नियमितीकरण और पदोन्नति: दैनिक वेतन भोगी, संविदा, जनभागीदारी और आउटसोर्स श्रमिकों की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए उनके नियमितीकरण और पदोन्नति के अवसरों की मांग की गई है। इसके अलावा, कार्यभारित सेवकों की नियमित सेवाओं में संविलयन की प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने का आग्रह किया जाएगा।
पदोन्नति में पारदर्शिता: मुख्यमंत्री की पहल पर जारी पदोन्नति प्रक्रिया में छानबीन समितियों द्वारा की जा रही कथित अनियमितता, पक्षपात और हेराफेरी की जांच की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
संघ के प्रदेश प्रवक्ता शोएब सिद्दीकी के अनुसार, इन सभी विषयों पर सामूहिक चर्चा कर समाधान के लिए शासन स्तर पर ठोस कदम उठाने का आग्रह किया जाएगा।

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