भोपाल, 9 अगस्त 2026: भारतीय वन सेवा के रिटायर्ड ऑफिसर श्री आजाद सिंह डबास का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले के मामले में ईमानदारी से कार्रवाई की गई होती, तो ना NEET पेपर लीक होता और ना ही कॉकरोच जनता पार्टी का कोई अस्तित्व होता। आज जो आंदोलन मोदी सरकार के पांव में जहरीला कांटा बनाकर चुभा हुआ है। यह व्यापम घोटाले के रूप में 2013 में ही बड़ा हो गया था। यदि तभी काट दिया होता तो आज जहर नहीं फैलता"। हमने आजाद सिंह के इस बयान के Fact Check किए और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:-
भारत में परीक्षा घोटाले की शुरुआत
परीक्षाओं में नकल और सामूहिक नकल के मामले तो हमेशा से सामने आते रहते थे लेकिन यह कोई संगठित अपराध नहीं थे। 1981 में पहली बार बिहार बोर्ड का इंटर परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जिसने एक साथ पूरी परीक्षा प्रणाली को प्रभावित किया। देश भर में इसकी निंदा की गई और कड़ी कानूनी कार्रवाई हुई। इसका नतीजा यह हुआ कि अगले 6 साल तक भारत में ऐसा कोई अपराध नहीं हुआ।
1987 में UP बोर्ड हाईस्कूल/इंटर पेपर लीक हुआ था। एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक दबाव बना। नतीजा कई सालों तक भारत की किसी राज्य में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
1992 राजस्थान का RPSC भर्ती परीक्षा विवाद। यहां पहली बार सरकार पर घोटाले का आरोप लगाया गया। सरकार और अभ्यर्थियों के बीच विवाद की स्थिति बनी। सरकार के दामन पर दाग लगा।
जब नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 1994 में BPSC भर्ती परीक्षा घोटाला हो गया। आप कह सकते हैं कि, बिहार के नेताओं ने राजस्थान से प्रेरणा पाई।
इसके 3 साल बाद उत्तर प्रदेश पीएससी विवाद हो गया। कहना पड़ेगा कि राजस्थान और बिहार में कोई कार्रवाई नहीं हुई इसलिए उत्तर प्रदेश को प्रेरणा मिली।
1998 में पहली बार हरियाणा में शिक्षक भर्ती घोटाला हुआ। शिक्षक को भारत का भाग्य विधाता भी कहते हैं, इसलिए इस घोटाले की व्यापक निंदा हुई, लेकिन यहां भी नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सन 2000 में RAS परीक्षा पेपर लीक हुआ।
जब राजस्थान में पेपर लिखकर मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो 2001 में दिल्ली में CBSE बोर्ड पेपर लीक कर दिया गया।
राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश के बाद 2002 में गुजरात में पीएससी भर्ती घोटाला हुआ।
1998 में हरियाणा शिक्षक भर्ती घोटाले में कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो इससे उत्साहित होकर 2003 में बिहार शिक्षा भर्ती घोटाला हो गया।
व्यापम घोटाला: भारत में परीक्षा घोटालों के नए युग की शुरुआत
2004 में परीक्षा माफिया ने मध्य प्रदेश की तरफ देखा। और पहली बार निष्पक्ष एवं इमानदार व्यावसायिक परीक्षा मंडल पर अनियमितताओं का आरोप लगा। इससे पहले तक के मामले बहुत सीमित थे लेकिन इसके बाद सब कुछ बदलने लगा। 2005-6 में परीक्षा माफिया ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बना ली थी। 2015 से लेकर 2013 तक लगभग हर प्रकार की भर्ती परीक्षा और प्रवेश परीक्षा में घोटाले हुए।
- MP Police Constable
- Forest Guard
- Sub Engineer
- Food Inspector
- PMT
- Pre-PG
- Nursing
- Dairy Officer
- Jail Prahari
- Teacher Eligibility एवं अन्य अनेक परीक्षाएं
यह भारत का सबसे बड़ा परीक्षा घोटाला था। इसकी चर्चा पूरी दुनिया में हुई क्योंकि इसमें सरकार के हर ऑफिस का कनेक्शन मिल रहा था। कई लोगों की अचानक मृत्यु होने लगी। कोई एक्सीडेंट का शिकार हुआ तो कोई अचानक हार्ट अटैक आ जाने से मर गया। कुछ लोगों ने आत्महत्याएं भी की। बाद में मामला सीबीआई को दिया गया और सीबीआई ने वह किया जिसकी कोई उम्मीद नहीं थी। मीडिया ट्रायल के दौरान मामले का पूरा खुलासा हो चुका था। व्यापम घोटाली की जांच के लिए बनाई गई SIT के पास भी कई सबूत थे, कई महत्वपूर्ण लोगों की गवाही थी, लेकिन देखते ही देखते सब कुछ कपूर की तरह उड़ने लगा। कुछ समय बाद कहीं कोई निशान ही नहीं बचा।
इसके कारण परीक्षा माफिया में एक गजब का कॉन्फिडेंस बिल्ड अप हुआ। उनको समझ में आ गया था कि यदि सरकार में बैठे नेताओं को शामिल कर लिया जाए तो घोटाले का खुलासा होने के बाद भी कोई एक्शन नहीं होता। सीबीआई से भी डरने की जरूरत नहीं है। इसके बाद जो कुछ हुआ वह बताने की जरूरत नहीं है। परीक्षा में जो गड़बड़ियां केवल बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक सीमित रहा करती थी। 2005 से लेकर 2026 तक और खास तौर पर व्यापम घोटाला के पीक 2013 से लेकर 2026 तक उपरोक्त राज्यों के अलावा हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, असम यहां तक की मणिपुर में भी पेपर लीक की घटनाएं हुई। और अंत में NEET जैसी परीक्षा का पेपर लीक हो गया।
इसलिए रिटायर्ड आईएफएस ऑफीसर श्री आजाद सिंह डबास का यह निष्कर्ष कि यदि व्यापम घोटाले पर नेताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर दी जाती। यदि तत्कालीन मुख्यमंत्री से इस्तीफा लेकर उनके खिलाफ जांच की जाती और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती, तो पूरे देश में कानून के प्रति सम्मान और परीक्षा माफिया के दिल में कानून का डर बैठ जाता है। फिर इस तरह हर साल कई परीक्षा घोटाले और पेपर लीक नहीं होते। युवाओं में इस प्रकार आक्रोश नहीं भरता। यदि उनके साथ अन्याय नहीं होता तो वह किसी को गाली भी नहीं देते। सरकार के सामने वह स्थिति नहीं बनती जो बन गई है।
व्यापम घोटाले के बाद इस तरह के घोटालों की बाढ़ आ गई
2013: SSC Combined Graduate Level (CGL) परीक्षा - पेपर लीक, परीक्षा रद्द, री-टेस्ट।
2015: AIPMT (All India Pre-Medical Test) - बड़े पैमाने पर लीक और ब्लूटूथ/इलेक्ट्रॉनिक धांधली; सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द कर री-टेस्ट का आदेश दिया।
2016: SSC CPO (Sub-Inspector) परीक्षा - फेसबुक पर पेपर का हिस्सा लीक, परीक्षा रद्द।
2018: CBSE कक्षा 10 गणित और कक्षा 12 अर्थशास्त्र पेपर - व्हाट्सऐप पर व्यापक रूप से लीक; री-एग्जाम (लाखों छात्र प्रभावित)।
2021: कुछ मामलों में CTET, JEE Main, NEET से जुड़े आरोप/जांच।
2024: NEET-UG - बिहार/झारखंड आदि में लीक के आरोप; CBI जांच, ग्रेस मार्क्स विवाद, सीमित री-टेस्ट। UGC-NET जून 2024 - परीक्षा रद्द (डार्कनेट/सोशल मीडिया पर सर्कुलेशन के आरोप), CBI जांच।
2026: NEET-UG में फिर लीक/अनियमितता के आरोप; परीक्षा रद्द और री-टेस्ट की प्रक्रिया।
मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के प्रमुख मामले
राजस्थान: 2013: RAS Prelims
2021: REET (Rajasthan Eligibility Exam for Teachers) - बड़े पैमाने पर लीक, परीक्षा रद्द, सैकड़ों गिरफ्तारियां।
कई अन्य (SI भर्ती, शिक्षक भर्ती, Forest Guard आदि) में बार-बार लीक और रद्दीकरण।
उत्तर प्रदेश: 2014: UPCPMT (मेडिकल)।
2021: UPTET - परीक्षा रद्द।
2024: UP Police Constable भर्ती (लगभग 48 लाख उम्मीदवार प्रभावित) — पेपर लीक के आरोप पर रद्द। UPPSC RO/ARO परीक्षा भी प्रभावित।
बिहार: 2022: BPSC 67th Combined Prelims — सोशल मीडिया पर लीक, रद्द।
शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं में कई मामले (solver gangs शामिल)।
अन्य राज्य: गुजरात: कई भर्ती परीक्षाएं (क्लर्क, शिक्षक आदि) रद्द।
हरियाणा: HTET और अन्य।
उत्तराखंड, झारखंड, तेलंगाना, महाराष्ट्र, असम, हिमाचल प्रदेश आदि में भर्ती और बोर्ड परीक्षाओं में कई लीक (TSPSC, JSSC, TET आदि)।
दिल्ली: DSSSB आदि कुछ मामले।
अन्य प्रमुख शिक्षा घोटाले (पेपर लीक के अलावा)
पश्चिम बंगाल SSC भर्ती घोटाला (2016 पैनल से जुड़ा, 2022 में बड़ा उजागर): OMR शीट हेरफेर, मार्क शीट में बदलाव, अवैध नियुक्तियां। लगभग 25,000+ शिक्षकों/गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्तियां हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द। पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी आदि गिरफ्तार; ED/CBI जांच और संपत्ति जब्ती।
सामान्य पैटर्न
ज्यादातर लीक प्रिंटिंग स्टेज, स्ट्रॉन्ग रूम, परीक्षा केंद्र या अंदरूनी लोगों (अधिकारी/कर्मचारी) के जरिए होते हैं। व्हाट्सऐप/सोशल मीडिया/डार्कनेट से तेजी से फैलते हैं। solver gangs और बिचौलिए सक्रिय रहते हैं। कई राज्यों ने सख्त कानून बनाए (जैसे 10 साल की सजा, जुर्माना), और केंद्र में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू हुआ, लेकिन या तो मामले दर्ज नहीं हुए मामले दर्ज हुए तो जांच नहीं हुई जांच हुई तो सबूत पेश नहीं किए। क्योंकि सब कुछ तो सरकार के हाथ में है।

.webp)