समझाइश और समझौतों से विवादों का निपटारा भारत की प्राचीन परंपरा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - Access to Justice in MP

Updesh Awasthee
इंदौर, 8 अगस्त 2026:
ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 8 अगस्त को 'इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' (Enhancing Access to Justice) विषय पर वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुरूप सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ समाज के हर वर्ग के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सुशासन (Good Governance) को न्याय का वास्तविक आधार बताया और कहा कि न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व ही हमारे लोकतंत्र की नींव हैं। 

भारतीय न्याय परंपरा और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान 

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने पर जोर देते हुए 'पंच परमेश्वर' और भगवान श्रीकृष्ण के गीता ज्ञान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में समझाइश और समझौतों के माध्यम से विवादों को सुलझाने का पुराना इतिहास रहा है। आज के समय में मध्यस्थता (Mediation) के माध्यम से छोटे मामलों का निपटारा करना केस पेंडेंसी (Case Pendency) जैसी गंभीर समस्या का समाधान हो सकता है। कार्यक्रम में 'विवाद से सहमति' नामक मध्यस्थता सर्टिफिकेट कोर्स का भी शुभारंभ किया गया, जो नागरिकों को स्वयं की सहमति से समाधान निकालने की शक्ति देगा। 

Modernization of Indian Judicial System

न्याय प्रणाली में बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंग्रेजों के दौर के गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त कर न्याय को जन-हितैषी बनाया गया है। अब 'जनविश्वास अधिनियम' जैसे कानूनों के माध्यम से छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। आधुनिक समय की जरूरतों को देखते हुए ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और डिजिटल डेटा संग्रह जैसी Digital Justice प्रणालियों को लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश सरकार ने पेपर लीक और धोखाधड़ी के मामलों के लिए 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में मात्र 24 घंटे के भीतर किया है। 

Social Justice and UCC in Madhya Pradesh

डॉ. यादव ने सामाजिक समरसता और न्याय में समानता की बात करते हुए बताया कि राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) से संबंधित विधेयक पारित किया जा चुका है, जो पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई समिति के सुझावों पर आधारित है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि न्याय में सभी धर्मों का सम्मान होगा और सरकार किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं करेगी। इसके साथ ही, लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और सम्राट विक्रमादित्य के न्यायप्रिय शासन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि न्याय में देरी भी एक प्रकार का अन्याय है। 

NALSA Initiatives for Inclusive Justice

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय केवल कानून से नहीं, बल्कि संवाद (Dialogue) से संभव है। उन्होंने कहा कि न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना केवल संस्थाओं की नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान नालसा (NALSA) का थीम सॉन्ग 'इंडियन साइन लैंग्वेज' में लॉन्च किया गया और दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि में मार्गदर्शिका का विमोचन किया गया। इसके साथ ही 'जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम' की शुरुआत भी की गई, जो बच्चों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। 

Reaching the Last Mile with Legal Aid

केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना राज्य का दायित्व है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्याय प्रक्रिया को बहुभाषीय बनाकर इसे और अधिक सुलभ बना रहा है। जस्टिस सूर्यकांत ने पैरा लीगल वॉलेंटियर्स (PLVs) को 'लीगल सेना' बताया और कहा कि हमारी असली परीक्षा उन तक पहुँचने में है जो न्याय की आस में हमारे पास नहीं आ पाते। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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