कुलपति की जान बचाने जज की कार लूटने वाले छात्र नेताओं को सीआईडी की क्लीन चिट

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 10 जुलाई 2026:
दिनांक 11 दिसंबर 2023 कि वह घटना तो आपको भी याद होगी, जब दो छात्र नेताओं ने, पूर्व कुलपति की जान बचाने के लिए रेलवे स्टेशन से एक न्यायाधीश की कर छीन ली थी। न्यायाधीश महोदय ने छात्र नेताओं के खिलाफ डकैती का मामला दर्ज करवा दिया था। इस मामले में हम सब ने छात्र नेताओं का सपोर्ट किया था और आज सीआईडी ने भी छात्र नेताओं को क्लीन चिट दे दी है। कोर्ट में मामले की क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है। मामला यदि याद नहीं है तो विस्तार से पढ़िए:- 

Justice Sanjeev S. Kalgaonkar car robbery case

यह घटना ग्वालियर में दिनांक 11 दिसंबर 2023 की है। ट्रेन में अचानक रिटायर्ड कुलपति रणजीत सिंह की तबीयत खराब हो गई थी। रेलवे स्टेशन पर एंबुलेंस होना चाहिए लेकिन नहीं थी। सामने एक कार खड़ी हुई थी। छात्र नेता हिमांशु श्रोती और सुकृत शर्मा ने ड्राइवर से मदद मांगी लेकिन ड्राइवर ने मदद करने से इनकार कर दिया। रिटायर्ड कुलपति की जान बचाने के लिए छात्र नेताओं ने ड्राइवर से CAR को छीना और रिटायर्ड कुलपति का अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद CAR को वापस कर दिया गया। यह कार जस्टिस संजीव एस कालगांवकर की थी। उन्होंने दोनों छात्र नेताओं के खिलाफ डकैती का मामला दर्ज करवा दिया। 

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उस समय भोपाल समाचार डॉट कॉम सहित तमाम मीडिया प्रतिष्ठानों ने दोनों छात्र नेताओं का पक्ष जनता के सामने रखा और तथ्य और तर्कों सहित यह बताया गया कि, इस प्रकार की घटना में डकैती का मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। दोनों छात्र नेताओं के साथ अन्याय किया गया है। पब्लिक ने भी प्रोटेस्ट किया था लेकिन मामला दर्ज करवाने वाले पावरफुल न्यायाधीश के कारण छात्र नेताओं की गिरफ्तारी को स्थगित करके मामले की जांच नहीं की गई। दोनों छात्र नेताओं को गिरफ्तार किया गया। स्पेशल कोर्ट ने भी पावरफुल न्यायाधीश के पक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि मदद विनम्रता पूर्वक मांगी जाती है, बलपूर्वक नहीं। लेकिन हाईकोर्ट ने न्याय किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों छात्र नेताओं का मकसद लूट या डकैती नहीं था। 

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मध्य प्रदेश शासन और पुलिस विभाग भी इस मामले में छात्र नेताओं के साथ थे। उन्होंने भी छात्र नेताओं की जमानत का विरोध नहीं किया। सीआईडी इंस्पेक्टर अशरफ अली अंसारी को मामले की जांच सौंप गई थी। उन्होंने डिटेल जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट में बताया कि, छात्र नेताओं ने किसी भी प्रकार का अपराध नहीं किया है। अपराध करना उनकी मंशा नहीं थी। यह मानवीय संवेदनाओं का मामला है। इसके साथ सीआईडी द्वारा मामले में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है। इसका मतलब है कि दोनों छात्रों के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है।

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