भोपाल, 19 जून 2026: अपनी असफलताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान बंटाने के लिए बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित करवाने वाले कुलगुरु (कुलपति) प्रोफेसर सुरेश कुमार जैन को बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से हटा दिया गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया। राज्यपाल महोदय द्वारा मंजूर कर लिया गया और उनके स्थान पर प्रभारी कुलगुरु की नियुक्ति भी कर दी गई है।
प्रो. विवेक शर्मा बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलगुरु
राज भवन से आधिकारिक सूचना मिली है कि, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के कुलगुरु प्रो. एसके जैन ने इस्तीफा दे दिया है। जिसे शुक्रवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मंजूर कर लिया गया। प्रो. विवेक शर्मा को कुलगुरु का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे नए की नियुक्ति तक पद संभालेंगे। राज्यपाल पटेल ने मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के तहत प्राप्त कुलाधिपति की शक्तियों के तहत विश्वविद्यालय के नए कुलगुरु की नियुक्ति होने तक कार्य संपादन के लिए प्रो. शर्मा को नामांकित किया है। प्रो. शर्मा संकायाध्यक्ष, प्रबंध संकाय, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय हैं।
ध्यान बंटाने के लिए यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव पास करवाया था
पिछले दिनों बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिषद द्वारा अचानक यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव पास कर दिया गया था। जबकि बरकतुल्लाह के नाम पर भोपाल में कोई डिबेट नहीं है। भोपाल में केवल गद्दार दोस्त खान अफगानी और उसके रिश्तेदारों का विरोध होता है। भोपाल के मूल मुसलमान भी, इनका विरोध करते हैं। भोपाल में बरकतुल्लाह का सम्मान हमेशा से था। लोग हमीदिया अस्पताल का नाम बदलने की मांग करते हैं, लेकिन अचानक बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव पास हो गया। बाद में पता चला, यह सब कुछ कुलगुरु महोदय की राजनीति थी।
विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद होने लगी थी। भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे थे, और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेताओं ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। डायरी के कुछ ऐसे पन्ने खुल गए थे जिसके कारण प्रोफेसर सुरेश कुमार की कुर्सी खतरे में पड़ गई थी। इसलिए उन्होंने अंतिम हथियार के रूप में यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित करवा कर खुद को विचारधारा का वफादार प्रमाणित करने की कोशिश की।
इस्तीफा तो उच्च शिक्षा मंत्री को भी देना चाहिए
उच्च शिक्षा विभाग में 15,481 स्वीकृत शैक्षणिक पदों में से 9,290 खाली हैं। यानी करीब 60% पद पर कोई प्रोफेसर नहीं है। एक तरफ नवीन कॉलेज खुल रहे हैं, मुख्यमंत्री नवीन संकाय की घोषणा कर रहे हैं और दूसरी तरफ स्वीकृत पदों की संख्या में वृद्धि होने के स्थान पर, जो पद पहले से स्वीकृत है उन पर भी नियुक्ति नहीं हो रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा में 40% पर सरकार नहीं बनती। यदि किसी मंत्री के विभाग में 40% पद खाली है तो यह उस मंत्री के लिए शर्म की बात है, और उसको भी इस्तीफा दे देना चाहिए, लेकिन क्या करें विपक्ष कमजोर है। जब तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद वाले आंदोलन नहीं करेंगे तब तक कुछ नहीं होगा। या फिर शायद कॉकरोच जनता पार्टी वाले कुछ करें तो दुनिया का ध्यान जाए।

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