पुरुष के हाथों में महिला का हाथ, का मतलब विवाह के समान संबंध नहीं होता: हाई कोर्ट

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 9 मई 2026
: आफ्टर मैरिटल अफेयर और Marital Disputes Between Husband and Wife मामले में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि, यदि किसी पुरुष के हाथ में महिला का हाथ दिखाई दे रहा है तो इसका मतलब, उन दोनों के बीच पति-पत्नी के समान संबंध नहीं माने जा सकते। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर चंबल संभाग में इस तरह के प्रसंग में "हाथ पकड़ लेना" का मतलब होता है "रख लेना" (पुरुष ने विवाह किए बिना महिला को अपने संरक्षण में रख लिया है और दोनों के बीच फिजिकल रिलेशन भी है)।

Holding a Woman’s Hand Does Not Amount to Marriage-Like Relationship: High Court

ग्वालियर निवासी एक महिला ने कोर्ट में 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' रिट दायर की थी। महिला का आरोप था कि उसके पति, सास और ननद ने उसे प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया है। उसके दो बच्चों को जबरन अपने कब्जे में रख लिया। काउंसलिंग के दौरान यह भी सामने आया कि पति खुद पत्नी के साथ मारपीट और गाली-गलौज की बात स्वीकार कर चुका था। इधर पति ने कोर्ट में एक स्क्रीनशॉट प्रस्तुत किया जिसमें उसकी पत्नी एक अन्य पुरुष का हाथ पकड़े हुए हैं। पति ने कोर्ट को बताएं कि उसकी पत्नी ने दूसरे पुरुष का हाथ पकड़ लिया है। इस प्रकार उसके साथ विश्वास घात किया है। 

कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद, टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई महिला किसी पुरुष का हाथ पकड़ लेती है, तो केवल इस आधार पर उसको चरित्रहीन नहीं कहा जा सकता। महज हाथ पकड़ने से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि वह दोहरा जीवन जी रही है। कोर्ट ने साढ़े तीन और डेढ़ साल के दो बच्चों की कस्टडी उनकी मां को सौंपते हुए कहा कि बच्चों के विकास के लिए मां की ममता और सानिध्य जरूरी है। साथ ही पति को पत्नी और बच्चों के भरण पोषण के लिए 15 हजार रुपए प्रति माह देने का आदेश दिया है।

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