गजब के अधिकारी, मीटिंग में बुलाया नहीं और कारण बताओ नोटिस ठोक दिया, कर्मचारी प्रताड़ना

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 25 मई 2026:
शासकीय व्यवस्था, कानूनी संरक्षण, नेताओं से अवैध रिश्ते और गांधारी कांग्रेस के चलते मध्य प्रदेश में अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों को खुलेआम प्रताड़ित किया जा रहा है। दतिया में एक अधिकारी ने अधीनस्थ कर्मचारी को एक महत्वपूर्ण मीटिंग में अनुपस्थिति के लिए कारण बताओं नोटिस दे दिया, जबकि कर्मचारी को मीटिंग में उपस्थित होने के लिए कोई सूचना ही नहीं दी गई थी। 

Employee Harassment Alleged: Show Cause Notice Issued Without Inviting Officer to Meeting

मामला दतिया का है और इस बार बैक मार गया है। सीएमएचओ डॉ. बीके वर्मा एनक्वास (NQAS) की बैठक डॉ. एसएस बाथम को इस बैठक में उपस्थित रहने के लिए सूचित नहीं किया गया। बैठक के बाद डॉक्टर वर्मा ने डॉक्टर बाथम को बैठक में अनुपस्थिति के लिए कारण बताओं नोटिस जारी कर दिया। दरअसल, सीएमएचओ डॉक्टर वर्मा, लंबे समय से डॉक्टर बाथम को परेशान कर रहे हैं। दोनों के बीच में तनाव का क्या कारण है यह तो नहीं पता चल सका लेकिन इतना कंफर्म हो गया कि तनाव काफी बढ़ गया है। इसी के चलते कारण बताओं नोटिस जारी किया गया लेकिन इस बार बैक फायर कर गया। 

डॉक्टर बाथम ने अपने स्पष्टीकरण में सीएमएचओ वर्मा से बड़ा ही तीखा सवाल किया। उन्होंने पूछा कि, उन्हें बैठक की जानकारी मौखिक या लिखित रूप से कब और कैसे दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई आदेश जारी हुआ था, तो उसकी प्रति नोटिस के साथ संलग्न की जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि छवि खराब करने के लिए उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। 

आखिर कौन सी मीटिंग है जो लगातार चलती रहती है

डॉ. बाथम ने पत्र में लिखा कि वे कई बार कार्यालय की समस्याओं और स्टाफ की उपलब्धता पर चर्चा करने पहुंचे, लेकिन हर बार यह कहकर लौटा दिया गया कि 'साहब मीटिंग में हैं।' उन्होंने सवाल उठाया कि आज तक समझ नहीं आया कि आखिर कौन सी मीटिंग लगातार चलती रहती है। डॉक्टर ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में एक ग्रुप में साझा किए गए पत्राचार की तरह, पूर्व में भी अनर्गल पत्राचार कर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है।

डॉक्टर ने सीएमएचओ पर पहले से ही पूर्वाग्रह से ग्रसित होने और लंबे समय से व्यक्तिगत द्वेष रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने पत्र में चेतावनी दी है कि भविष्य में द्वेषभावना से भरा पत्राचार बंद किया जाए, अन्यथा इसे मानसिक प्रताड़ना मानकर वे वैधानिक कार्रवाई के लिए मजबूर होंगे। डॉ. बाथम ने अपने इस जवाब की प्रतिलिपि राज्य मानवाधिकार आयोग, कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेज दी है।

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