सीएम डॉ मोहन यादव ने धार भोजशाला में रचा इतिहास, गंगा दशहरा के दिन ज्ञान की गंगा देवी का पूजन

Updesh Awasthee
भोपाल, 25 मई 2026
: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज एक बार फिर इतिहास रच दिया है। गंगा दशहरा के दिन डॉक्टर मोहन ने ज्ञान की गंगा देवी सरस्वती के मंदिर धार भोजशाला पहुंचकर, धूमधाम के साथ उनकी पूजा अर्चना की। मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने धार भोजशाला में पूजा की है। 1055 में राजा भोज ने आखरी बार यहां पर मां सरस्वती की पूजा की थी। उसके बाद से किसी भी राजा या राजसत्ता से संबंधित व्यक्ति ने सरस्वती माई के चरणों में माथा नहीं टेका।

भोजशाला विवाद और मुख्यमंत्री का व्यवहार

1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह (कांग्रेस पार्टी) के कार्यकाल में यहां पर हिंदू श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी और मंगलवार की पूजा पर भी रोक लगा दी गई थी। जबकि शुक्रवार की नमाज को लेकर कोई अनुशासन या प्रतिबंध नहीं लगाया। 
2003 में दिग्विजय सिंह शासन काल के दौरान जब, मंगलवार की पूजा पर प्रतिबंध लगाया गया तो पूरे प्रदेश में आंदोलन खड़ा हो गया तब 7 अप्रैल 2003 को एक समझौता व्यवस्था लागू की गई जिसके तहत मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई। 
भारतीय जनता पार्टी की ओर से सीएम कैंडिडेट साध्वी उमा भारती ने 2003 के विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को जोर-जोर से उठाया। परिणाम स्वरूप भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला और उमा भारती मुख्यमंत्री बनी लेकिन, चुनाव जीतने के बाद भी वह धार भोजशाला में पूजा करने के लिए नहीं गई जबकि मंगलवार को पूजा करने की अनुमति थी। 
इस कहानी में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री बाबूलाल गौर की तो चर्चा ही नहीं कर सकते क्योंकि उनके लिए यह कोई मुद्दा ही नहीं था। 
29 नवंबर 2005 को श्री शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। तब से लेकर 2023 तक श्री शिवराज सिंह चौहान ने धार भोजशाला के बारे में कई बयान और भाषण दिए। हर बार भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर बताया, लेकिन कभी दर्शन करने तक को नहीं गए। मामले को निपटाने के लिए एक मुख्यमंत्री के तौर पर, औपचारिक या अनौपचारिक कोई प्रयास नहीं किया। 

डॉ मोहन यादव की लाइन क्लियर है

इस तरह के मामलों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की लाइन बिल्कुल क्लियर है। उन्होंने अपने शपथ ग्रहण से लेकर हाईकोर्ट के फैसले तक, धार भोजशाला को लेकर कोई बयान नहीं दिया, कोई भाषण नहीं दिया। बस एक काम किया। गंगा दशहरा के पवित्र दिन, जब भारत भूमि पर भूख प्यास से तड़प रही जनता के कल्याण के लिए गंगा में प्रकट हुई थी, ठीक उसी दिन शुभ मुहूर्त में पूजा की थाली उठाई और धार भोजशाला के लिए निकल पड़े। यहां उल्लेख करना ही पड़ेगा कि, डॉ मोहन यादव भारत के सबसे उच्च शिक्षित मुख्यमंत्री हैं, और आज गंगा दशहरा के दिन, ज्ञान की गंगा देवी सरस्वती की पूजा करके, सरस्वती लोक की घोषणा करके, भारतवर्ष के कल्याण के लिए ज्ञान की गंगा को प्रकट करने का अनुष्ठान कर रहे हैं। 

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