मध्य प्रदेश पटवारी भर्ती परीक्षा के संबंध में MPESB का स्पष्टीकरण और उसका अर्थ सरल हिंदी में पढ़िए

Madhya Pradesh employees selection board Bhopal द्वारा एक समाचार के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया गया है। सरकारी जटिल हिंदी भाषा के शब्दों का उपयोग करते हुए जो कुछ भी लिखा है उसका आशा सिर्फ इतना है कि हम सिर्फ परीक्षा का आयोजन करते हैं। कोई भी व्यक्ति फीस भरकर MPESB द्वारा आयोजित कोई भी परीक्षा दे सकता है। हम उसकी आयु और शिक्षा आदि किसी चीज की जांच नहीं करते। यदि उम्मीदवार चाहे तो गलत जानकारी देकर परीक्षा में शामिल हो सकता है। 

कर्मचारी चयन मंडल भोपाल का स्पष्टीकरण पढ़िए

दिनांक 24 फरवरी 2024 को दैनिक समाचार पत्र 'पटवारी भर्ती.... संविदा कर्मियों की मेरिट लिस्ट में 45% अयोग्य, इन्होंने 21-26 की उम्र में स्नातक और 5 साल का अनुभव बताया' के संबंध में कर्मचारी मंडल चयन मंडल की ओर से स्पष्ट किया जाता है कि मध्य प्रदेश राजपत्र दिनांक 4 अक्टूबर 2013 के माध्यम से जारी 'मध्य प्रदेश कनिष्ठ सेवा संयुक्त अर्हता परीक्षा नियम 2013' के अनुसार विभागों / उपक्रमों द्वारा मंडल को विभागीय नियम एवं आरक्षण तालिका सहित मांग पत्र प्रेषित किया जाता है, तदानुसार ही मंडल द्वारा अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन पत्र में जानकारी प्राप्त कर परीक्षा का आयोजन एवं परिणाम घोषित किया जाता है। परिणाम के आधार पर मंडल द्वारा विभागों द्वारा प्रदत्त पदों की रिक्तियों के अनुसार उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के नामो की अनुशंसा नियुक्ति हेतु की जाती है। संबंधित विभाग ऑनलाइन आवेदन पत्र में अहर्ता से संबंधित जानकारी अनुसार अपेक्षित दस्तावेजों का परीक्षण कर ही नियुक्ति आदेश जारी करता है। 

राजपत्र में प्रकाशित उक्त नियम अनुसार ही समूह 2 उपसमूह 4, पटवारी सयुंक्त भर्ती परीक्षा-2022 हेतु जारी नियम पुस्तिका मे स्पष्ट उल्लेखित है कि ऑनलाइन आवेदन पत्र में भरी गई जानकारी का सत्यापन चयन के समय संबंधित विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान करने के पूर्व किया जाता है। यदि आवेदक द्वारा भरी गयी जानकारी असत्य पायी जाती है तो संबंधित विभाग द्वारा नियुक्ति नहीं की जाती है। साथ ही ऑनलाइन आवेदन पत्र में आवेदक द्वारा आवेदन में अंकित जानकारी की सत्यता के सम्बन्ध में घोषणा भी दी जाती है। 

ऑनलाइन आवेदन पत्र भरते समय यदि किसी अभ्यर्थी ने संविदा कर्मचारी अंकित किया है तो उसे सम्बंधित दस्तावेज अपलोड करना होता है। आवेदन पत्र में अपलोड किये गए दस्तावेजों का परिक्षण मंडल स्तर नहीं किया जाता है। परीक्षा परिणाम में उसे संविदा कर्मी श्रेणी में रखते हुए ही चयन सूची तैयार की जाती है। अर्थात् उम्मीदवार द्वारा आवेदन पत्र भरते समय चुने गए विकल्प के अनुसार ही कर्मचारी चयन मंडल परिणाम जारी करता है। अतः कर्मचारी चयन मंडल द्वारा की जाने वाली उपरोक्त संपूर्ण कार्यवाही विधि सम्मत और नियम के अनुसार ही की गई है। 

कर्मचारी चयन मंडल भोपाल के स्पष्टीकरण का अर्थ सरल हिंदी में 

हम सरकारी विभागों के निर्देशानुसार परीक्षा का आयोजन करते हैं। हमारा अपना कोई स्टैंडर्ड नहीं है। यदि विभाग न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष लिख देगा तो हम 15 साल के बच्चों की परीक्षा करवा देंगे। 
हम केवल सरकारी विभागों के निर्देशों का पालन करते हैं। यदि सरकारी विभाग की तरफ से कोई गलत निर्देश आ गया है तो हम हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट का ध्यान उसे तरफ आकर्षित करने हेतु कोई प्रक्रिया नहीं करते। 

दुनिया भले ही AI का इस्तेमाल करने लगी हो परंतु हमने अपने ऑनलाइन फॉर्म में ऐसा कोई सिस्टम एक्टिवेट नहीं किया है जिसके कारण यह सुनिश्चित किया जा सके कि, जो उम्मीदवार द्वारा जो डाटा सबमिट किया जा रहा है वह निर्धारित नियम शर्तों के अनुरूप है या नहीं। उदाहरण के तौर पर यदि विभाग ने छात्र की योग्यता ग्रेजुएट और 3 साल का अनुभव मांगा है तो कर्मचारी चयन मंडल के ऑनलाइन फॉर्म में कोई फ़िल्टर नहीं लगाया जाता। 17 साल का बच्चा फोटोकॉपी की मशीन से किसी की भी मार्कशीट उठाकर अपलोड कर दे और लिख दे कि उसे 3 साल का अनुभव है, तो उसे परीक्षा में शामिल होने अनुमति दे दी जाती है क्योंकि उसने फीस भरी है। 

अंत में मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल भोपाल ने समझाया है कि हमने जो भी किया है सरकारी विभाग के निर्देशानुसार किया है। यदि हमारे काम में कोई गड़बड़ है तो डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय उसे गड़बड़ी को पकड़ना सरकारी विभाग की जिम्मेदारी है। कृपया अपने समाचार को संशोधित करें। व्यापम को नहीं बल्कि डिपार्टमेंट को टारगेट करें।  

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