INDORE NEWS- पायरेटेड बुक्स का बाजार, 1000 वाली किताब डेढ़ सौ रुपए में, पुलिस करवाई

Bhopal Samachar
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इंदौर
। प्रिंटिंग प्रेस को सरकारी सपोर्ट खत्म हो गया है इसके कारण किताबें महंगी हो गई है। प्रतियोगी परीक्षा और कोर्स की कुछ किताबें ऑनलाइन PDF भी नहीं मिलती। कई बच्चों के पास मंथली टिफिन के पैसे भी नहीं होते किताब कैसे खरीदें। उनकी इस प्रॉब्लम को सॉल्व करता है पायरेटेड बुक्स का बाजार जो गैरकानूनी है लेकिन जहां से किताब खरीद कर सफल हुए कई कैंडीडेट्स कानून की रक्षा कर रहे हैं। यही कारण है कि पुलिस थोड़ा नरम रुख रखती है लेकिन जब असली पब्लिशर्स ने शिकायत की तो कार्रवाई भी करनी पड़ी। 

इंदौर में पायरेटेड बुक्स कहां मिलती हैं

इंजीनियरिंग के लिए कोटा राजस्थान और UPSC के लिए दिल्ली के कोचिंग इंस्टिट्यूट फेमस है परंतु इंदौर में आपको सभी प्रकार की परीक्षाओं के लिए कोचिंग मिल जाती है। यह देश का एक ऐसा शहर है जहां देश के हर इंस्टिट्यूट की ब्रांच है और भारत का हर प्रसिद्ध टीचर इंदौर में आकर जरूर पढ़ाता है। इसके कारण इंदौर में स्टूडेंट्स की काफी भीड़ रहती है। यही कारण है कि इंदौर में पायरेटेड बुक्स का पूरा बाजार बन गया है। खजूरी बाजार में कई दुकानों पर पायरेटेड बुक्स मिलती है। 

पायरेटेड बुक्स क्या होता है, इससे क्या फायदा

पायरेटेड बुक्स में वह सब कुछ होता है जो ओरिजिनल बुक में होता है, बस प्रिंटिंग में अंतर होता है। सस्ता कागज और स्याही का उपयोग किया जाता है जिसके कारण किताब मजबूत नहीं रहती और सालों साल नहीं चलती लेकिन इसके कारण महंगी किताबें सस्ते में मिल जाती हैं। निश्चित रूप से यह एक गैर कानूनी काम है लेकिन सोसाइटी को इसका फायदा भी है। जो मिडिल क्लास स्टूडेंट किसी सरकारी योजना के दायरे में नहीं आते लेकिन उनके पास रहने और खाने के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं होता। वह स्टूडेंट्स पायरेटेड किताबों से पढ़ाई कर पाते हैं। यही कारण है कि पुलिस भी पायरेटेड बुक्स की अवैध इंडस्ट्री पर कड़ी कार्रवाई नहीं करती। 

इंदौर में पायरेटेड बुक्स की दुकान, जिनके खिलाफ कार्रवाई हुई

सराफा थाना पुलिस ने 63 कॉपीराइट एक्ट के तहत फरियादी संजीव कुमार राघव उम्र 48 साल निवासी प्रथम मंजिल स्वर्ण जयंती पुरम गाजियाबाद यूपी की शिकायत पर न्यू चेलावत बुक स्टोर खजूरी बाजार के नितिन चेलावत निवासी मनुश्री एरोड्रम के खिलाफ शुक्रवार 3 फरवरी को केस दर्ज किया है। नितिन पर आरोप है कि उनके द्वारा विभिन्न प्रकाशनों की पाइरेटेड व डुप्लीकेट किताबें असली बताकर बेची जा रही है। 

अधिवक्ता संजीव कुमार राघव ने नकली किताबों की बिक्री और दुकानों के सबूत मिलने के बाद पिछले हफ्ते सोमवार को इंदौर पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र को पूरे मामले की शिकायत की गई। चेलावत बुक सेंटर, न्यू जैन बुक स्टोर, त्रिवेणी बुक स्टोर, गणेश बुक स्टोर आदि दुकानों की जानकारी दी। ये लोग गोदाम में बड़ी मात्रा में नकली किताब रख अन्य दुकानदारों को सप्लाई करते है और खुद भी बेचते हैं।

नकली और असली किताब में अंतर

अधिवक्ता संजीव कुमार राघव का कहना है कि दोनों किताबों के बीच प्रिंटिंग और वजन का अंतर सबसे महत्वपूर्ण होता है। असली किताब का कागज अच्छी क्वालिटी का होता है और उसकी स्याही भी बेस्ट क्वालिटी की होती है। नकली किताबों का कागज घटिया होता है और उनकी स्याही आंखों को नुकसान पहुंचाती है। नकली किताबों की स्याही में ऐसे कीटाणु भी होते हैं जो हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं और कैंसर का कारण बन सकते हैं। यही कारण है कि नकली किताबों की कीमत असली किताबों की तुलना में 10% होती है। श्री राघव ने बताया कि कई दुकानदार तो नकली किताब को असली किताब की कीमत में बेच रहे हैं। यह अपराध के साथ-साथ पाप भी है।

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