तानसेन समारोह ग्वालियर 2022- शिवपुरी, दतिया और बटेश्वर की संगीत सभाओं का टाइम टेबल- MP NEWS

ग्वालियर
। विश्व संगीत समागम “तानसेन समारोह” के तहत आयोजित होने वाली संगीत सभाओं के साथ-साथ शिवपुरी, दतिया और बटेश्वर की संगीत सभाओं के कलाकारों के नाम भी तय हो गए हैं। इसी के साथ सभी संगीत सभाओं की समय सारणी जारी कर दी गई है।

तानसेन समारोह ग्वालियर 2022 की तारीख

भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव तानसेन समारोह का इस साल 98वाँ वर्ष है। तानसेन समारोह इस साल संगीत नगरी ग्वालियर में 19 से 23 दिसम्बर तक आयोजित होगा। 19 दिसम्बर को सायंकाल समारोह का औपचारिक शुभारंभ होगा और तानसेन अलंकरण प्रदान किया जायेगा। 

तानसेन समारोह से पहले गमक संगीत सभाएं होंगी

तानसेन समारोह के शुभारंभ से तीन दिन पहले से पूर्वरंग “गमक” की सभाएँ भी होंगीं। तानसेन समारोह के तहत गमक की पहली सभा 16 दिसम्बर को शिवपुरी में आयोजित होगी। इसके बाद 17 दिसंबर को दूसरी सभा दतिया में और ग्वालियर के इंटक मैदान में 18 दिसम्बर को सायंकाल पूर्वरंग “गमक” की सभा सजेगी। जिसमें सुविख्यात सूफी गायक हंस राज हंस जी की प्रस्तुति होगी। समारोह के तहत 22 दिसंबर को एक सभा मुरैना जिले के अंतर्गत ग्राम पढ़ावली के समीप स्थित ऐतिहासिक स्थल बटेश्वर मंदिर प्रांगण में सजेगी। यह सभा शास्त्रीय संगीत की रहेगी। 

ग्वालियर में तानसेन समारोह का आयोजन कौन करता है

इस साल के तानसेन समारोह में भी देश एवं विदेश से आ रहे ब्रम्हनाद के शीर्षस्थ साधक गान मनीषी तानसेन को स्वरांजलि अर्पित करेंगे। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के लिये उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी व मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा तानसेन समारोह का आयोजन किया जाता है।

ग्वालियर तानसेन समारोह 2022, संगीत सभाओं का शेड्यूल

इस बार के समारोह में “गमक” की तीन सभाओं के अलावा कुल 10 संगीत सभायें होंगी। पहली 7 संगीत सभाएं सुर सम्राट तानसेन की समाधि एवं मोहम्मद गौस के मकबरा परिसर में भव्य एवं आकर्षक मंच पर सजेंगीं। समारोह की आठवीं एवं प्रात:कालीन सभा सुर सम्राट तानसेन की जन्मस्थली बेहट में 23 दिसम्बर को झिलमिल नदी के किनारे सजेगी। किला परिसर स्थित गूजरी महल में समारोह की नौवीं एवं आखिरी संगीत सभा 23 दिसम्बर को सायंकाल आयोजित होगी।

तानसेन समारोह की प्रात:कालीन संगीत सभाएं प्रात: 10 बजे और सायंकालीन सभाएं सायंकाल 6 बजे शुरू होंगीं। संगीत सभाओं में प्रस्तुति देने आ रहे कलाकारों का ब्यौरा इस प्रकार है –  

पूर्वरंग गमक शिवपुरी (16 दिसम्बर)

तानसेन समारोह के विस्तार के तहत शिवपुरी में 16 दिसम्बर को “गमक” की पहली सभा होगी। इस सभा में देश की सुविख्यात उप शास्त्रीय गायिका श्रीमती मालिनी अवस्थी लखनऊ की प्रस्तुति आकर्षण का केन्द्र होगी। इस सभा में इनके अलावा श्री देवेन्द्र राजपूत ग्वालियर का ध्रुपद गायन, सुश्री स्नेहलता सिंघल ग्वालियर का सितार वादन एवं ध्रुपद गुरू श्री अभिजीत सुखदाणे ग्वालियर की प्रस्तुति होगी।  

पूर्वरंग गमक दतिया (17 दिसम्बर)            

समारोह के तहत 17 दिसम्बर को दतिया में पूर्वरंग “गमक” की दूसरी सभा सजेगी। इस सांगीतिक सभा में श्री हर्षवर्धन दुबे दतिया का गायन, जनाब अफ़जल हुसैन भोपाल का ध्रुपद गायन, सुश्री संस्कृति – प्रकृति बहाने उज्जैन की सितार – संतूर जुगलबंदी और सुश्री आस्था गोस्वामी मथुरा का गायन होगा।  

ग्वालियर गमक- 18 दिसंबर 

विश्व समागम तानसेन समारोह की पूर्व संध्या यानि 18 दिसम्बर को सायंकाल 7 बजे हजीरा चौराहे के समीप स्थित इंटक मैदान में उप शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम पूर्वरंग “गमक” होगा। गमक में पंजाब के सुविख्यात सूफियाना गायक श्री हंस राज हंस की प्रस्तुति होगी। हंस राज हंस ऐसे सूफियाना गायक हैं, जिन्होंने सूफियाना गायकी के साथ-साथ शास्त्रीयता पर आधारित गानों के माध्यम से नई विधा पेश की है। उन्होंने फिल्मों में भी “तेरे बिन नईं जीना मरजाना…”, “खुदा आसमां नीचे…”, “टोटे-टोटे हो गया…” जैसे गाने पेश कर सुगम संगीत के क्षेत्र में अपनी खास पहचान बनाई है।  

ग्वालियर में गमक की सभा से पहले लोक कला यात्रा निकलेगी 

गमक की सभा शुरू होने से पहले शाम 5 बजे से गूजरी महल किलागेट से भव्य लोक कला यात्रा निकाली जाएगी। इसमें लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ेंगे। यह यात्रा किला रोड व हजीरा होते हुए गमक आयोजन स्थल अर्थात इंटक मैदान पहुंचेगी।  

संगीत सभा बटेश्वर 22 दिसम्बर (प्रात:काल)

श्री विवेक नवले इंदौर का तबला वादन, सुश्री साधना गोरे ग्वालियर का गायन व श्री प्रभात कुमार दिल्ली का सरोद वादन होगा।  

हरिकथा व मीलाद गायन से होगा पारंपरिक शुभारंभ

गान महर्षि तानसेन की स्मृति में आयोजित होने वाले "तानसेन समारोह'' के अपने अलग ही रंग हैं । समारोह के शुभारंभ दिवस को प्रात: काल में तानसेन की समाधि पर सामाजिक समरसता के सजीव दर्शन होते हैं। इस बार 19 दिसम्बर को प्रात: काल पारंपरिक रूप से हरिकथा, मीलाद, शहनाई वादन व चादरपोशी के साथ "तानसेन समारोह'' का पारंपरिक शुभारंभ होगा। 

सायंकालीन सभा 19 दिसम्बर - तानसेन समाधि स्थल

सभा का शुभारंभ पारंपरिक रूप से शासकीय माधव संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा। इस सभा में तानसेन सम्मान से विभूषित कलाकार पं. नित्यानंद हल्दीपुर मुम्बई बाँसुरी वादन प्रस्तुत करेंगे। इस सभा में ख्यातिनाम गायक जनाब वासिफुद्दीन डागर दिल्ली का ध्रुपद गायन और देश की सुविख्यात शास्त्रीय गायिका विदुषी अश्विनी भिड़े देशपांडे पुणे का गायन होगा।  

प्रात:कालीन सभा 20 दिसम्बर - तानसेन समाधि स्थल

इस सभा का शुभारंभ शंकर गंधर्व संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा। सभा में सुश्री दीपिका भिड़े भागवत मुम्बई का गायन, श्री डालचंद शर्मा दिल्ली का पखावज वादन, सुश्री फड़के देशपाण्डे पुणे का गायन और श्री ब्रजभूषण गोस्वामी दिल्ली के ध्रुपद गायन की प्रस्तुति होगी।  

सायंकालीन सभा 20 दिसम्बर - तानसेन समाधि स्थल

इस सभा का आरंभ शंकर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा। इस सभा में श्री धानी गुंदेचा भोपाल का ध्रुपद गायन, श्री व्यंकटेश कुमार धारवाड़ का गायन, श्री विश्व मोहन भट्ट एवं सलिल भट्ट जयपुर का मोहनवीणा वादन एवं सुश्री सुषमा वाजपेयी कानपुर का गायन होगा।  

प्रात:कालीन सभा 21 दिसम्बर - तानसेन समाधि स्थल

इस सभा के आरंभ में तानसेन संगीत महाविद्यालय ग्वालियर की ध्रुपद प्रस्तुति होगी। इसके बाद श्री सुखदेव चतुर्वेदी मुम्बई का ध्रुपद गायन, श्री अभिषेक बोरकर पुणे का सरोद वादन, श्री आनंद भाटे पुणे का गायन एवं श्री प्रवीण शेवलीकर भोपाल के वायोलिन वादन की प्रस्तुति होगी।  

सायंकालीन सभा 21 दिसम्बर - तानसेन समाधि स्थल

इस सभा की शुरूआत ध्रुपद केन्द्र ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी। इसके बाद विदुषी परवीन सुल्ताना मुम्बई का गायन, श्री संतोष संत इंदौर का बांसुरी वादन, श्री राजेश सेंध मुम्बई का ध्रुपद गायन एवं श्रीराम उमड़ेकर ग्वालियर का सितार वादन होगा।  

प्रात:कालीन सभा 22 दिसम्बर - तानसेन समाधि स्थल

सभा की शुरूआत पारंपरिक रूप से सारदा नाद मंदिर ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी। इसके बाद श्री विनोद मिश्रा सतना का गायन, श्री दिनेश शुक्ला इंदौर का तबला वादन, श्री उमेश कंपूवाले ग्वालियर का गायन एवं श्री हर्ष नारायण मुम्बई का सारंगी वादन होगा।  

सायंकालीन सभा 22 दिसम्बर - तानसेन समाधि स्थल

इस सभा का शुभारंभ भारतीय संगीत महाविद्यालय के ध्रुपद गायन से होगा। इसके पश्चात सुश्री अनुजा झोकरकर पुणे का गायन, श्री शशांक सुब्रमण्यम चैन्नई का बांसुरी वादन, श्री जयतीर्थ मेवुण्डी धारवाड़ का गायन और श्री संजू सहाय लंदन (वाराणसी) का तबला वादन होगा।  

प्रात:कालीन सभा 23 दिसम्बर – बेहट

सभा के प्रारंभ में ध्रुपद केन्द्र बेहट का ध्रुपद गायन होगा। इसके बाद श्री हरविंदर सिंह चंडीगढ का गायन, श्री विनय बिन्दे एवं श्री प्रणय पराड़कर ग्वालियर की तबला जुगलबंदी और श्री आदित्य शर्मा ग्वालियर की ध्रुपद गायन प्रस्तुति होगी।  

अंतिम संगीत सभा (सायंकाल) – 23 दिसम्बर, गूजरी महल

सभा की शुरूआत साधना संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी। इसके पश्चात सुश्री शिल्पा मसूदकर इंदौर का गायन, सुश्री अनुप्रिया देवताले इंदौर का वायोलिन वादन और सुश्री रीता देव दिल्ली का गायन होगा।  

वादी - संवादी एवं चित्रकला कार्यशाला

समारोह के अंतर्गत राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में दो दिन 20 एवं 21 दिसंबर को वादी संवादी कार्यक्रम के तहत आमंत्रित कलाकार प्रदर्शन सह व्याख्यान देंगे। इसी तरह ललित कला संस्थान के कला विद्यार्थी तानसेन समारोह स्थल पर आयोजित वर्कशॉप में चित्र बनाएंगे। उधर कला वीथिका में भी कला प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।