बर्खास्त अधिकारी को गुजारा भत्ता के नियम क्या है, HIGH COURT ने MP GOV से पूछा

इंदौर
। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए मध्यप्रदेश शासन से बर्खास्त कर्मचारी एवं अधिकारियों को गुजारा भत्ता के नियमों के बारे में पूछा है। नोटिस का जवाब प्रस्तुत करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया गया है।

याचिकाकर्ता वन विभाग से बर्खास्त कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट आफिसर, इंदौर निवासी रामलाल पटेल की ओर से अधिवक्ता श्रीमती अंचन पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में लोकायुक्त द्वारा प्रकरण दर्ज करने के बाद लोकायुक्त के विशेष न्यायालय ने दोषी करार देते हुए सजा सुना दी। उस सजा के विरुद्ध हाई कोर्ट में अपील विचाराधीन है। 

चूंकि सजा सुनाए जाने के साथ ही याचिकाकर्ता को सेवा से एकपक्षीय तरीके से सुनवाई का अवसर दिए बिना बर्खास्त कर दिया गया और गुजारा भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है, अत: हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने यह याचिका की सुनवाई क्षेत्राधिकार जबलपुर की जगह इंदौर होने के आधार पर याचिका निरस्त कर दी। 

याचिकाकर्ता को इंदौर बेंच की शरण लेने की स्वतंत्रता दी किंतु याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ के समक्ष अपील एकलपीठ के आदेश को अपील के जरिए चुनौती दे दी। हाई कोर्ट की डबल बेंच में अपील निरस्त कर दी गई। इसके बाद नए सिरे से इंदौर खंडपीठ में याचिका प्रस्तुत की गई। जहां याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया गया एवं हाईकोर्ट ने वन विभाग सहित मध्यप्रदेश शासन से पेंशन एक्ट के रूल 64 अंतर्गत प्रोवजिनल पेंशन यानी गुजारा भत्ता के प्रावधान से संबंधित जानकारी मांगी है।