NOC के बिना अनुकंपा नियुक्ति आदेश रद्द, अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई: इलाहाबाद हाई कोर्ट

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद स्थित हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि शासकीय कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके किसी भी आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने से पहले उसके सभी आश्रितों की NOC अनिवार्य है। इस मामले में हाईकोर्ट ने उस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं जिसने NOC के बिना अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी कर दिए थे।

न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा ने इस मामले में फैसला सुनाया है। याचिका सुनीता देवी द्वारा नाबालिग पुत्र मोहित कुमार पांडेय के माध्यम से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राहुल सिंह ने उच्च न्यायालय में उनका पक्ष रखा। याचिका के अनुसार संगीता चंद्रा के पति राजेंद्र प्रसाद पांडेय प्रयागराज के बघाड़ा मोहल्ले में ट्यूबवेल ऑपरेटर पद पर कार्यरत थे। राजेंद्र प्रसाद की दो शादियां हुई थीं। पहली पत्नी से रोहित कुमार पांडेय व एक पुत्री है। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद राजेंद्र प्रसाद ने सुनीता देवी से विवाह किया था। सुनीता देवी से उनके पांच बच्चे हुए।

पहली पत्नी के बड़े बेटे को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार है या नहीं

राजेंद्र प्रसाद की मृत्यु के बाद पहली पत्नी के बड़े पुत्र रोहित कुमार पांडेय ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। विभाग ने उसका आवेदन स्वीकार करते हुए 27 नवंबर 2021 को अनुकंपा नियुक्ति दी। इसी नियुक्ति आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनीता देवी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि अनुकंपा नियुक्ति देने में नियमों का पालन नही किया गया। नियुक्ति देने से पूर्व मृत कर्मचारी की विधवा और अन्य आश्रितों से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया, जो जरूरी था। 

याचिका में दावा किया गया कि रोहित ने अपनी आयु के संबंध में भी गलत तथ्य दिए हैं और गलत जन्मतिथि के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है। न्यायालय ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किया कि रोहित कुमार पांडेय को नियुक्ति देने में नियमों की अनदेखी की गई है तथा उसने अपने संबंध में तथ्य छिपाकर व झूठ बोलकर नियुक्ति प्राप्त की है। न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए जारी नियुक्ति का आदेश रद कर दिया है। 

साथ ही बिना बिना तथ्यों की जांच किए नियुक्ति देने के मामले में अधिशासी अभियंता ट्यूबवेल डिवीजन प्रथम प्रयागराज के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई को कहा है। कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रमुख सचिव सिंचाई विभाग को भेजने का निर्देश दिया है।