MP NEWS- प्रशासन झुका, श्री कृष्ण मंदिर के पट खोलने पड़े, खबर का असर

भारतीय जनता पार्टी के विधायक दिव्यराज सिंह के अनशन और भोपाल समाचार डॉट कॉम की खबर का असर दिखाई दिया है। न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग के 2 घंटे के भीतर उमरिया जिला प्रशासन एवं फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। इससे पहले उन्होंने धरने पर बैठे भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह और श्री कृष्ण भक्तों को पुलिस हिरासत में ले लिया था। 

मामला क्या है- जन्माष्टमी के दिन कृष्ण मंदिर में सरकारी ताला क्यों लगा

मध्यप्रदेश के उमरिया जिला की सीमा में बांधवगढ़ नेशनल पार्क के अंदर एक प्राचीन श्री कृष्ण मंदिर है जिसे बाँधवाधीश मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर 400 साल पुराना है यानी इसका अस्तित्व मध्य प्रदेश और बांधवगढ़ नेशनल पार्क से भी पुराना है। नेशनल पार्क की सीमा में आने के बाद इस मंदिर में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था। साल में एक बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर इस मंदिर के पट खुलते हैं और जन्म उत्सव मनाते हैं। 

यह मंदिर रीवा रियासत के राजा द्वारा बनवाया गया था। रीवा का राज परिवार अभी भी वहीं पर रहता है और खुद को राजा मानता है। स्थानीय प्रशासन के साथ रीवा राज परिवार की ईगो की लड़ाई चलती रहती है। इसी के चलते फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इस साल रीवा के राजा के मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। 

भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह खुद को रीवा का युवराज बताते हैं। जब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने अनुमति नहीं दी तो दिव्यराज सिंह अपने समर्थकों के साथ 18 अगस्त को धरने पर बैठ गए। उनके साथ पुष्पराज सिंह (जिन्हें रीवा का महाराजा साहब का जाता है) भी धरने पर बैठ गए। मोहिना कुमारी सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर अपील जारी की गई। 19 अगस्त को जब उनके समर्थकों की संख्या बढ़ने लगी तो प्रशासन ने पुलिस भेजकर सभी को हिरासत में ले लिया। इस प्रकार जिला प्रशासन ने यह जताया कि भारत में राजतंत्र समाप्त हो चुका है। लोकतंत्र में शासन के अधिकारी किसी राजा के दरबार में सलाम नहीं करेंगे।

यह ईगो की लड़ाई है जो पूरे भारत में इसी प्रकार से होती रही है, और जहां-जहां राज परिवार पावरफुल है, वहां-वहां इस प्रकार की लड़ाई आज भी देखी जाती है। इससे किसी को कोई आपत्ति भी नहीं है क्योंकि यह हाईप्रोफाइल मामला है परंतु इस दौरान मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ भी अभद्रता की गई। भोपाल समाचार डॉट कॉम द्वारा इस मामले को गंभीरता पूर्वक उठाया गया। समाचार के प्रसारित होने के 3 घंटे के भीतर श्रद्धालुओं को मंदिर में जाने एवं भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाने की अनुमति दे दी गई।