लड़कियों के उन दिनों से जुड़े सवालों के जवाब, चुप्पी तोड़ो- खुल के पूछो कैंपेन - BHOPAL NEWS

भोपाल।
मासिक धर्म (पीरियड) से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने एवं इस अवधि के दौरान स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों के प्रति जागरूकता हेतु मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया गया। अभियान 21 जून 2022 तक चुप्पी तोड़ो कैंपेन चालू रहेगा। मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य केंद्रों में परामर्श एवं जागरूकता सत्र हुए जिसमें किशोरियों को शारीरिक बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

लड़कियों में शारीरिक बदलाव सामान्य एवं प्राकृतिक प्रक्रिया है

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि किशोरावस्था शुरू होते ही लड़के एवं लड़कियों में कई शारीरिक बदलाव होते हैं, जो एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। लेकिन ज्यादातर किशोर- किशोरियों को शारीरिक बदलावों की जानकारी नहीं होती है । किशोरियों में होने वाले बदलावों में सबसे महत्वपूर्ण माहवारी की शुरुआत होना है। सही जानकारी ना होने के कारण लड़कियां माहवारी शुरू होने पर शर्मिंदगी का अनुभव करती है । जिसका असर उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है और कई बार तो उन्हें संक्रमण का सामना भी करना पड़ता है।

मासिक धर्म में स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी

मासिक धर्म स्वच्छता के विषय पर जयप्रकाश जिला चिकित्सालय में परामर्श एवं प्रश्नोत्तरी सत्रों में भर्ती महिलाओं को व्यक्तिगत एवं मासिक धर्म स्वच्छता के विषय पर जानकारी प्रदान की गई एवं सेनेटरी पैड के सही ढंग से उपयोग एवं निष्पादन के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया । हेल्थ एंड वैलनेस केंद्रों में पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर द्वारा किशोरी बालिकाओं में होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक परिवर्तनों के बारे में जानकारी दी गई। इसी के साथ किशोरी बालिकाओं को पेड या साफ सूखे कपड़े के इस्तेमाल एवं उसे हर 4 से 6 घंटे में बदलने की जानकारी दी गई । मासिक धर्म एक सामान्य प्रक्रिया है मासिक धर्म के दौरान साफ - सफाई का ध्यान रखा जाना आवश्यक है । माहवारी के दौरान सेनेटरी पैड का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित है किंतु सेनेटरी पैड की अनुपलब्धता में साफ एवं हल्के रंग के सूती कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है। सिंथेटिक कपड़े से बने पेड सुरक्षित नहीं होते हैं। नैपकिन को इस्तेमाल के बाद कागज में लपेट कर ऐसे कूड़ेदान में डाला जाना चाहिए जो प्रतिदिन खाली किए जाते हैं ।

IFA का सेवन खून की कमी से बचाता है

माहवारी कोई बीमारी नहीं है इसलिए इस दौरान सामान्य खानपान एवं दिनचर्या रखी जानी चाहिए। किशोरियों में खून की कमी से बचाव हेतु आयरन की गोलियों एवं हरी पत्तेदार सब्जियों का उपयोग किया जाना बहुत जरूरी है । साथ ही किशोरी बालिकाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर बनाए रखने के लिए आशा या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से आयरन की गोली का सेवन नियमित रूप से किया जाना चाहिए। 

योग से दर्द को कम किया जा सकता है 

कुछ महिलाओं में माहवारी के दौरान पेट में मरोड़ या दर्द, थकान, सरदर्द, कमर में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं । जो कि सामान्य है । माहवारी में दर्द के प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं में योग प्रशिक्षकों द्वारा योगिक क्रियाओं को सिखाया गया। सामान्य गति से चलना, वज्रासन, सुखासन, पश्चिमोत्तानासन भुजंगासन, तितली आसन, गहरी सांस लेना जैसी क्रियाओं के द्वारा माहवारी के दर्द या मरोड़ को कम किया जा सकता है। माहवारी महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। समाज में इसके प्रति फैली भ्रांतियों गलतफहमियां एवं धार्मिक विश्वासों से जोड़कर उसे जटिल बना दिया गया है। इसीलिए मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर जागरूकता गतिविधियों एवं शिक्षा सत्रों के माध्यम से सकारात्मक माहौल स्थापित करने का प्रयास किया जाता है।