MP TET VARG 3 टॉपिक- अधिगम और शिक्षाशास्त्र, वैकल्पिक अवधारणाएं, त्रुटियों को समझना

एमपी टेट वर्ग 3 में अधिगम और शिक्षाशास्त्र (Learning and Pedagogy) संबंधित 10 प्रश्न पूछे जाते हैं जिसका सबटॉपिक है" समस्या समाधानकर्ता और वैज्ञानिक- अन्वेषक के रूप में बच्चा, बच्चों में अधिगम की वैकल्पिक अवधारणाएं, बच्चों की त्रुटियों को अधिगम प्रक्रिया में सार्थक कड़ी के रूप में समझना।

बच्चा एक समस्या समाधक के रूप में / Child as a Problem Solver

किसी भी समस्या को सुलझाना हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम हर दिन सरल से लेकर जटिल तक कई प्रकार की समस्याओं का समाधान करते हैं। कुछ समस्याओं को हल करने में समय लगता है जबकि कुछ में अधिक समय लगता है। इसी प्रकार बच्चों के स्कूली जीवन में भी कई प्रकार की समस्याएं सामने आती हैं जिनका समाधान भी उन्हें ही ढूंढना पड़ता है। 

यह शिक्षक का काम है कि बच्चों को इस स्तर पर योग्य बनाया जाए और उनका व्यक्तिगत विकास किया जाए जिससे कि वह किसी भी प्रकार की परिस्थितियों का सामना कर सकें और एक समाधानकर्ता बन सकें। 

इसके लिए सबसे पहले समस्या को समझना जरूरी है, फिर उसके बारे में जानकारी एकत्र करना, संभावित समस्या का समाधानों का मूल्यांकन, संभावित समाधानों  का निर्माण, संभावित समाधानों का परीक्षण, निष्कर्षों का निर्णय, समाधान का प्रयोग इसके लिए बच्चों में आत्म पहचान पहचान का गुण विकसित करना चाहिए। जिससे कि बच्चे अपनी कमियों को स्वीकार करें और उन्हें दूर करना सीख सकें। बच्चों को स्वावलंबी बनने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। 

समस्या समाधान एक ऐसी प्रक्रिया का प्रारूप है जिस ढांचे में सृजनात्मक चिंतन एवं वैचारिक संतुलन का तालमेल बनता है। थार्नडाइक का गलती करके सीखने का सिद्धांत (Trial and Error Theory), कोहलर का अंतर्दृष्टि सिद्धांत(Insightful  of Kohler) आदि समस्या समाधान के ही उदाहरण हैं। 

बच्चा एक वैज्ञानिक अन्वेषक के रूप / Child As A Scientific Investigator 

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार" बच्चे नन्हे वैज्ञानिक हैं "और वे अपनी समस्याओं का समाधान खुद ही ढूंढते हैं। जब बच्चे अपने ज्ञान और अनुभव के माध्यम से किसी समस्या के प्रत्येक पहलू को जानने लगते हैं, तो स्वयं ही समस्या का समाधान खोज लेते हैं। तब बच्चे में एक वैज्ञानिक अन्वेषक के गुण आने लगते हैं और वे अपनी समस्याओं का स्वयं समाधान करने लगते हैं। बच्चे अपने संज्ञानात्मक स्तर के अनुरूप विज्ञान के तथ्यों व धारणाओं को समझने का प्रयास करते हैं, इसके बाद वह अपने तरीके से समस्या को समझते हैं और उसका समाधान निकालने की कोशिश करते हैं। 

बच्चों में वैज्ञानिक गुणों का विकास करने के लिए उनके सामने छोटी-छोटी समस्याएं रखकर उन्हें संभावित समाधानों के निर्माण के लिए प्रेरित करना चाहिए। जिससे की बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित हो सके। 

बच्चों की त्रुटियों को अधिगम प्रक्रिया में सार्थक कड़ी के रूप में समझना

कहा जाता है कि त्रुटियां या गलतियां बच्चों के सोचने समझने की प्रक्रिया को बताने का एक बड़ा ही सशक्त माध्यम होती हैं। यह खिड़की की तरह होती हैं जिनसे यह पता लगाया जा सकता है कि बच्चा कहां और किस प्रकार  सोच रहा है और  गलती कर रहा है। गलतियां के द्वारा  शिक्षक के बच्चों के सोचने-समझने की प्रक्रिया को समझ सकते हैं और यह गलतियां शिक्षक के लिए एक महत्वपूर्ण टूल की तरह से कार्य करती हैं। इस प्रकार गलतियां अधिगम की प्रक्रिया में एक सार्थक कड़ी के रूप में कार्य करती हैं। बच्चों द्वारा की गई यह त्रुटियां या गलतियां ही कई बार बड़े-बड़े अविष्कारों को जन्म दे देती हैं।
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