MP TET VARG 3 टॉपिक- अधिगम एवं शिक्षाशास्त्र, मूलभूत प्रक्रियाएं, रणनीतियां, सामाजिक प्रक्रिया के रूप में, सामाजिक संदर्भ

Updesh Awasthee
एमपीटेट वर्ग 3 का एक बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है अधिगम एवं शिक्षाशास्त्र, इसी का सबटॉपिक है" शिक्षण और अधिगम की मूलभूत प्रक्रियाएं, बच्चों के अधिगम की रणनीतियां, अधिगम एक सामाजिक प्रक्रिया के रूप में, अधिगम का सामाजिक संदर्भ। 

शिक्षण और अधिगम की मूलभूत प्रक्रियाएं

शिक्षा का बुनियादी तथ्य यह है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक गुणवान शिक्षक के ऊपर ही निर्भर करती है। चाहे शिक्षक एवं शिक्षार्थी दोनों विषम परिस्थितियों में ही क्यों ना हो चाहे, शिक्षक आज के सर्वोत्तम आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित कक्षा में क्यों ना हो, चाहे वह विद्यार्थियों के एक छोटे से समुदाय के साथ हो या फिर टीवी पर, मोबाइल पर चल रहे पाठ का संचालन कर रहा हो जिसे हजारों- लाखों विद्यार्थी एक साथ देखकर
सीख रहे हो या फिर पूर्णता एक नियत कालीन कार्यक्रम के रूप हो, हर स्थिति में यह स्पष्ट है कि बेहतर शिक्षण, एक बेहतर शिक्षक द्वारा, बेहतर शिक्षण प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है। इसलिए महत्वपूर्ण है कि शिक्षण के कार्य के लिए महत्वपूर्ण रणनीतियां (शिक्षण विधियां) तैयार की जाएं जिससे की सही दिशा में मार्गदर्शन किया जा सके। 

बच्चों के अधिगम की रणनीतियां

शिक्षण का अर्थ ऐसे अनुभवों और संदर्भों से होना चाहिए जो शिक्षार्थी को सीखने के लिए इच्छुक और योग्य बनाएं। शिक्षक का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य है कि बच्चे को एक ऐसा परिवेश प्रदान किया जाए, जिसमें उसे जानकारी के लिए स्वतः ही खोज करने के  अवसर प्रदान किए जाएं। अधिगम एक सक्रिय प्रक्रिया है, जिसमें त्रुटियां होंगी और समाधान भी मिलेंगे। 

शिक्षण -सूत्र / Teaching Formulas 

शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षण के सिद्धांत सूत्र के रूप में प्रत्येक शिक्षक को कुछ मौलिक सिद्धांतों को ध्यान रखना चाहिए-
1) ज्ञात से अज्ञात की ओर
2) सामान्य से विशिष्ट  की ओर
3) पूर्ण से अंश की ओर 
4) मूर्त से अमूर्त की ओर
5) आगमन से निगमन की ओर
यह शिक्षण के सामान्य सूत्र हैं, जिनके प्रयोग से किसी भी प्रकार के शिक्षण को अधिक सरल, सुगम, स्पष्ट और रोचक बनाया जा सकता है। 

अधिगम एक सामाजिक प्रक्रिया के रूप में एवं अधिगम का सामाजिक संदर्भ 

अधिगम या सीखना एक जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है। संसार में प्रत्येक व्यक्ति की सीखने की कला व्यक्तिगत रूप से अलग-अलग होती है। महान दार्शनिक अरस्तु के अनुसार" मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है" प्रत्येक व्यक्ति समाज के माध्यम से सीखता है ,जो उसके दिन प्रतिदिन क्रियाओं में देखने को मिलता है। 

जब एक बच्चे का जन्म होता है तो परिवार उसकी प्रथम पाठशाला की भूमिका निभाता है, परिवार भी समाज का एक छोटा मॉडल या मिनिएचर वर्जन ही होता है। इसके बाद वह विद्यालय में प्रवेश करता है तो उसका सामाजिक विस्तार बढ़ जाता है और वह मित्रों, शिक्षकों के संपर्क में आता है। मित्र और शिक्षक दोनों बालकों के सीखने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो परिवार और विद्यालय से ही बच्चे के समाजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और समाज के माध्यम से ही अधिकतम व्यवहार सीखता है। जो की उसके व्यवहारिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। अधिगम की प्रक्रिया में भी समाज का अपना महत्वपूर्ण स्थान है। बच्चों को समाज के द्वारा विभिन्न प्रकार के अनुभव प्राप्त होते हैं, जिसके द्वारा बच्चे सक्रिय रूप से अपने अनुभवों का निर्माण करते हैं. अधिगम की प्रक्रिया समाज और संस्कृति पर भी निर्भर करती है। सामाजिक क्रियाकलापों का बच्चे के अधिगम पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.
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