कॉपीराइट अधिकार अधिनियम, 1957 क्या है, संक्षिप्त में पढ़िए - Legal General Knowledge

जब कोई व्यक्ति अपनी बौद्धिक संपदा अर्थात अपने दिमाग के कारण कोई लेख, कविता, नाटक, कहानी, भाषण, वीडियो, पुस्तक आदि लिखता है तब उसकी लिखी रचना की कोई नकल नहीं कर सके क्योंकि उस रचना को उसने स्वयं के विवेक द्वारा लिखी है उसकी बौद्विक संपत्ति को सुरक्षा के लिए कॉपीराइट अधिकार अधिनियम,1957 बनाया गया। 

कॉपीराइट के उल्लंघन के लिए दण्ड

अगर कोई व्यक्ति किसी लेखक (कोई भी व्यक्ति के निजी विचार आदि) की रचना, कहनी, पुस्तक, भाषण, वीडियो को स्वंय के नाम से छापता है या कॉपीराइट करता है वह सिविल एवं आपराधिक दोनो प्रकार से दण्डित किया जा सकता है।

1. सिविल दण्ड:- अधिनियम की धारा 55 अनुसार पीड़ित व्यक्ति क्षतिपूर्ति की मांग कर सकता है एवं धारा-57 के अनुसार लेखक अपनी रचना का दावा कर सकता है।

2. आपराधिक दण्ड:- अधिनियम की धारा 63 के अंतर्गत कॉपीराइट करने वाले व्यक्ति को तीन वर्ष की सजा एवं दो लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

नोट:- अधिनियम की धारा 64 के अंतर्गत कॉपीराइट करने वाले व्यक्ति को पुलिस अधिकारी गिरफ्तार कर सकता है एवं उसे सक्षम न्यायालय में पेश करेगा। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com