यदि विवाह के बाद कोई धर्म बदल ले तो क्या तलाक का आधार हो सकता है - THE HINDU MARRIAGE ACT, 1955

हिंदू मैरिज एक्ट 1955 केवल उसी विवाह संबंध पर लागू होता है जो विवाह हिंदू रीति रिवाज एवं विधि के अनुसार हुआ हो। विवाह के बाद यदि दंपति में से कोई एक अपना धर्म बदल देता है तो क्या इस परिवर्तन के कारण विवाह संबंध विच्छेद किया जा सकता है। आइए जानते हैं:-

हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 (1)(ii) धर्म-परिवर्तन की परिभाषा:-

होशंगाबाद मध्य प्रदेश के लॉ स्टूडेंट श्री बीआर अहिरवार के अनुसार विवाह विच्छेद (तलाक) का चौथा आधार होता है पति या पत्नी द्वारा धर्म का परिवर्तन कर लेना। अगर कोई व्यक्ति अपने धर्म को नहीं मानता है, विश्वास नहीं करता है, धर्म की आलोचना करता है, स्वयं नास्तिक जीवन व्यतीत करता है अथवा बोलता है कि उसने हिन्दू धर्म त्याग कर दिया गया हैं इसको धर्म परिवर्तन नहीं माना जायेगा। जब तक वह व्यक्ति विधि के अनुसार अन्य धर्म को ग्रहण नहीं कर लेता है।

धर्म-परिवर्तन में विवाह विच्छेद (तलाक) कब मान्य होगा:-

कोई पति या पत्नी जब तक न्यायालय द्वारा तलाक या विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त नहीं कर लेते हैं तब तक धर्म-परिवर्तन को तलाक नहीं माना जायेगा एवं वह पति-पत्नी बने रहते हैं।एम.सीता रामूलू बनाम एम. विमला:- मामले में पत्नी ने विवाह के पश्चात ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था, न्यायालय में इसे विवाह-विच्छेद अर्थात तलाक का उचित आधार माना। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article

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