DGR LTD डायरेक्टरों के खिलाफ 409,420 और 120B के तहत मामला दर्ज - JABALPUR NEWS

Bhopal Samachar
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जबलपुर
। DGR Credit Cooperative Society Limited, Bhopal के फाउंडर डायरेक्टर उमेश गुप्ता एवं को फाउंडर डायरेक्टर अविनाश चौधरी के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 (अमानत में ख्यानत), 420 (धोखाधड़ी), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र की साजिश रचना) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इस मामले में EOW- आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने मामला दर्ज करने से पहले लंबी जांच की थी।

DGR Credit Cooperative Society Limited 2012 में बनाई थी

भोपाल में प्रीमियम टाॅवर जेके हाॅस्पिटल के पास रहने वाले उमेश गुप्ता ने 16 अक्टूबर 2012 को डीजीआर क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के नाम से एक फर्म का पंजीयन कराया था। सोसायटी में सैनिक सोसायटी गुप्तेश्वर वार्ड निवासी अविनाश चौधरी को सह डायरेक्टर व जबलपुर का जोनल मैनेजर बनाया था। दर्ज मामले के अनुसार फर्म ने भोपाल, जबलपुर, सीधी, सतना, रीवा, मऊगंज जैसे स्थानों पर अपने ब्रांच खोले। 2013 से 2017 के बीच में इस फर्म ने लोगों से अपनी जमा पूंजी निवेश कराई।

DGR Credit ने तीन तरह की स्कीम में आम जनता का पैसा इन्वेस्ट कराया

फर्म ने आम लोगों को लुभावने व आकर्षक ब्याज दरों पर एफडी ( फिक्स डिपाजिट) एमआईएस (मंथली इनकम स्कीम) और आरडी में पैसे निवेश कराए। सोसायटी के लोगों को ही एजेंट बनाया। शुरू में निवेशकों की मेच्योरिटी पर पैसे भी लौटाए गए। जब विश्वास बढ़ने पर अधिक लोगों ने पैसे निवेश कर दिए और मेच्योरिटी का वक्त आया तो वर्ष 2017 में सोसायटी अचानक बंद कर दी गई। 

जबलपुर में 18 पीड़ितों ने DGR Credit की शिकायत की थी

इस सोसायटी में पैसे निवेश करने वाले पीड़ित दो वर्षों तक भटकते रहे। 18 लोगों ने 2019 में प्रकरण में ईओडब्ल्यू में मामले की शिकायत दर्ज कराई। ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच में निवेशकों के साक्ष्य को पुख्ता पाया। सभी पीड़ितों ने कंपनी के तीनों स्कीम में 49 लाख, नौ हजार 473 रुपए जमा किए। मेच्योरिटी पर उन्हें अधिक राशि मिलती पर भुगतान किए बिना ही सोसायटी ब्रांच समेट कर भाग गई। 

DGR Credit पीड़ितों के नाम

मधु वाजपेयी, आशीष मित्रा, खुशाल पांडुरंग रंगारी, उसकी पत्नी मीना रंगारी, सायमन कुजूर, मेघा जैन, शेख करीब, विवेकानंद मरकाम, प्रद्युत राय, चंद्रप्रकाश गुप्ता, रामनाथ बर्मन, कल्लू तिवारी, उनकी पत्नी रुक्मणि तिवारी, रतना चक्रवर्ती, उनके पति अजीत कुमार चक्रवर्ती, संतोष कुमार सिंगरौल, उनके पिता विजय सिंह सिंगरौल और हरमीत कौर भाटिया ने एफडी में 21 लाख 8 हजार 273 रुपए, आरडी में 12 लाख एक हजार 200 रुपए और एमआईएस में 16 लाख रुपए जमा किए थे। 

सबूत भी नष्ट कर दिए

उमेश और उसके सह डायरेक्टर अविनाश चौधरी ने सबूत भी नष्ट कर दिया है। कई निवेशकों की मूल सर्टिफिकेट व मूल पास बुक मेच्योरिटी व एंट्री कराने के नाम पर छल से अपने पास रख लिया। इसके बाद निवेशकों को दिया ही नहीं। आरोपियों ने सोसायटी के नियमों का भी उल्लंघन किया। बिना सूचना दिए सोसायटी का पता बदल लिया। सोसायटी की एक भी वार्षिक आम सभा नहीं हुई। प्रतिवर्ष बोर्ड की चार मीटिंग बुलाने के नियम का भी पालन नहीं किया गया। इस तरह सोसायटी कभी अस्तित्व में आई ही नहीं।

ठगी का लंबा है नेटवर्क

ईओडब्ल्यू एसपी देवेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि सोसायटी के ठगी का लंबा नेटवर्क है। अभी सिर्फ जबलपुर के 18 लोगों की जांच में 49 लाख की ठगी का प्रकरण सामने आया है। जबकि सोसायटी ने भोपाल सहित अन्य जिलों में भी अपने ब्रांच खोले थे। वहां भी बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश किए थे। उनके भी पैसे सोसायटी ने नहीं लौटाए हैं। जांच में अन्य पीड़ितों के मामले जुड़ते जाएंगे।
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