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yesterday और tomorrow को हिंदी में 'कल' क्यों बोलते हैं, दो अलग-अलग शब्द क्यों नहीं / GK IN HINDI

हम दावा करते हैं कि हिंदी भाषा, अंग्रेजी भाषा से काफी समृद्ध और विषय को स्पष्ट करने में सक्षम है। अंग्रेजी में केवल 5 स्वर हैं और हिंदी में 13 हैं। अंग्रेजी में 21 व्यंजन है और हिंदी में 49 इस तरह हिंदी में अंग्रेजी की तुलना में दोगुने शब्द है फिर भी ऐसा क्यों है कि अंग्रेजी के 2 शब्द yesterday और tomorrow के बदले हिंदी में केवल एक शब्द 'कल' का उपयोग किया जाता है। आइए मजेदार प्रश्न का उत्तर जानने की कोशिश करते हैं:

आचार्य रजनीश (ओशो) के शिष्य एवं जबलपुर यूनिवर्सिटी से MBBS डॉक्टर श्री शैलेंद्र शेखर (जो इन दिनों ओशो आश्रम, मुरथल में रहते हैं) का कहना है कि समय और मृत्यु का पर्यायवाची शब्द “काल” तथा कल एक ही मूल धातु से निर्मित हैं। जो समय बीत गया, वह मृत हो गया, इसलिए वह कल कहलाता है। जो वक्त अभी आया नहीं, वह वास्तव में कहीं है नहीं, वह भी कल पुकारा जाता है।

विगत कल एवं आगामी कल, दोनों समय के अर्थात काल के हिस्से हैं। वस्तुतः दोनों का अस्तित्व नहीं है। केवल वर्तमान के क्षण का अस्तित्व है। सिर्फ यह पल जीवंत है। शेष मृतवत हैं। सदगुरु ओशो कहते हैं कि अतीत अब है नहीं और भविष्य अभी हुआ नहीं।उपरोक्त वजह से हमारे प्राचीन ऋषि होने संस्कृत भाषा का निर्माण बड़े चिंतन मनन के बाद किया। मृत्यु, समय एवं विगत व आगामी कल को एक ही शब्द दिया। 

निष्कर्ष: बीता हुआ कल या आने वाला कल समय यानी काल का ही एक भाग है, इसलिए उसे अलग-अलग शब्दों उपचारित नहीं किया गया। अंग्रेजी भाषा में समय को विभाजित करने की कोशिश की गई इसके पीछे उनके अपने लॉजिक हो सकते हैं। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article
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