आरपीडब्ल्यू कानून-2016 पर जागरूकता के लिए एनसीपीईडीपी का भोपाल में सेमिनार
       
        Loading...    
   

आरपीडब्ल्यू कानून-2016 पर जागरूकता के लिए एनसीपीईडीपी का भोपाल में सेमिनार

BHOPAL: विकलांग व्यक्तियों के अधिकारो और हितों का प्रतिनिधित्व करनेवाली अखिल भारतीय संस्था नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्पलॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल (एनसीपीईडीपी) ने विकलांग व्यक्तियों के बीच काम करनेवाले और उनके मुद्दों को उठानेवाले गैरलाभार्थी संगठन –आरूषि- के साथ मिलकर विकलांग व्यक्तियों के अधिकार कानून (आरपीडब्ल्यू एक्ट)-2016 पर भोपाल के मैरिएट होटल के कोर्टयार्ड में 16 और 17 मार्च को एक राज्यस्तरीय सेमिनार आयोजित किया था.

भारत ने आरपीडब्ल्यू एक्ट को दिसंबर 2016 में कानूनी दर्जा देकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दिए अपने वादे को पूरा किया जिससे घरेलू कानून को विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर हुए संयुक्त राष्ट्रसंघ के सम्मेलन के समकक्ष लाया जा सके जिसकी उसने अक्टूबर, 2007 में पुष्टि की थी. इस कानून के अस्तित्व में आने से अब विकलांगता कानून, 1995 निरस्त हो गया.

एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने बताया कि –‘नए कानून के प्रावधानों और उसके बाद इसके अंतर्गत उठाए गए विभिन्न कदमों से सभी को जागरूक करना बेहद महत्वपूर्ण है. आरपीडब्ल्यूडी एक्ट-2016 को राज्य स्तर पर क्रियान्वित किया जाना बेहद अहम है क्योंकि विकलांगता राज्य का विषय है. इस कानून के तहत 21 श्रेणियों को रेखांकित किया गया है और विकलांगता को मानवाधिकार के मुख्य मुद्दे का दर्जा देता है. वैसे यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूरे राज्य में इस कानून का क्रियान्वयन एक जैसा नहीं हो सका है.’

मध्यप्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय एवं विकलांग कल्याण विभाग के आईएएस अधिकारी कृष्ण गोपाल तिवारी इस सेमिनार में उपस्थित थे और उन्होंने कहा –‘आरपीडब्ल्यूडी एक्ट-2016 विकलांग व्यक्ति के सर्वांगीण विकास पर फोकस करता है और इसे देखते हुए इसकी जागरूकता और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है. वैसे तो विशेष स्कूल महत्वपूर्ण हैं लेकिन विकलांग बच्चों की शिक्षा के भीतर इस पर अधिक जोर देने की आवश्यता है.’

अरमान ने कहा –‘ यह आरपीडब्ल्यूडी एक्ट-2016 बहुत कुछ बदलाव लाने में सक्षम है क्योंकि इसकी जवाबदेही की जद में निजी क्षेत्र भी है. आरपीडब्ल्यूडी एक्ट-2016 को लागू करने की जिम्मेदारी केवल सामाजिक कल्याण विभाग की ही नहीं होनी चाहिए बल्कि इसमें शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभागों को भी शामिल करना चाहिए.’

इस अवसर पर अन्य वक्ताओं में भोपाल की दिग्दर्शिका इंस्टीट्यूट के असिस्टेंस प्रोफेसर मोहम्मद कलीम सिद्दीकी, सामाजिक न्याय विभाग के सहायक निदेशक सुनील शर्मा, भोपाल स्थित कंपोजिट रीजिनल सेंटर के डॉ. गणेश जोशी तथा आरूषि के कार्यकारी निदेशक डॉ. रोहित त्रिवेदी सहित कई क्षेत्रों के अग्रजों के अलावा मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में कार्यरत विकलांग संगठनों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों का समावेश था.

राज्य के सामाजिक न्याय एवं विकलांग कल्याण विभाग के सहायक निदेशक सुनील शर्मा ने मध्य प्रदेश में विकलांग अधिकार कानून 2016 के नजरिए मध्यप्रदेश में उसे लागू किए जाने की संपूर्ण जानकारी दी. शर्मा ने बताया कि किस तरह जिला स्तरीय कमेटियां 52 में से 50 जिलों में गठित की जा चुकी हैं, भले ही किसी भी विकलांग व्यक्ति को इन कमेटियों में शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि कई जिलों में विशेष जज और विशेष कोर्ट गठित किए गए हैं. उन्होंने कहा कि ‘जहां तक पहुंच की बात है सार्वजनिक इमारतों को इसके योग्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है. इसके अलावा वेब की पहुंच के मामले में सभी सरकारी वेबसाइट्स तक अब आसानी से पहुंचा जा सकता है.

सेमिनार को एक्सिस बैंक का सहयोग प्राप्त हुआ 

क्या है एनसीपीईडीपी?

एनसीपीईडीपी ‘नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्पलॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल’ 1996 में रजिस्टर्ड हुई नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्पलॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल देश की एक अग्रणी सर्वविकलांग सेवारत गैरलाभार्थी संस्था है जो सरकार, उद्योग, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और विकलांगता व्यक्तियों को सक्षम बनाने के लिए कार्यरत स्वयंसेवी क्षेत्र के बीच समन्वय सेतु का काम करती है. इसका उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को रोजगार के लिए उत्प्रेरित करना, विकलांगता के मुद्दे के प्रति लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करना, विकलांग लोगों को अधिक से अधिक जानकारी से सक्षम बनाना, सूचना और मौकों से उन्हें सूचित करना और सभी सार्वजनिक स्थानों में उनके प्रवेश को अनुकूल बनाना है.