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कलेक्टर ने बीजेपी नेता पर रासुका लगाई थी, हाईकोर्ट ने कलेक्टर पर जुर्माना ठोक दिया | MP NEWS

ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने भिंड कलेक्टर पर जुर्माना लगाया है। कोर्ट का कहना है कि भिंड कलेक्टर ने नियम विरुद्ध कार्रवाई करके हाईकोर्ट का समय बर्बाद किया। मामला भारतीय जनता पार्टी के नेता रामकरण राजावत पर लगाई गई रासुका का है। कलेक्टर ने उन मामलों का उल्लेख करते हुए भाजपा नेता पर रासुका लगा दी थी जिनमें बीजेपी नेता बरी हो चुके हैं।

भिंड कलेक्टर ने बीजेपी नेता रामकरण पर लगाई थी रासुका

भिंड कलेक्टर ने अक्टूबर 2018 में रामकरण के खिलाफ रासुका लगाई थी। इस मामले में नवंबर 2019 में रामकरण की गिरफ्तारी हुई थी। उन पर लगाई गई वर्ष 2001 से 2009 के बीच रासुका में दर्ज किए गए 8 मामले और 2018 में दर्ज किए गए प्रकरण को आधार बताया गया था। रामकरण के वकील ने हाई कोर्ट में सबूतों के साथ दलील दी थी कि 2001 से 2008 के बीच के सभी 8 मामलों में रामकरण राजावत को बरी किया जा चुका है, जबकि एक मामले में हाई कोर्ट से स्टे मिला है। ऐसे में कलेक्टर ने झूठे आरोप के आधार पर रासुका की कार्रवाई की है। इस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता रामकरण पर भिंड कलेक्टर की ओर से रासुका लगाने के आदेश को निरस्त कर दिया।

भिंड में पूर्व जनपद सदस्य और भाजपा नेता रामकरण सिंह राजावत के खिलाफ रासुका की कार्रवाई को नियम विरुद्ध बताते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने निरस्त कर दिया है। भाजपा नेता की बेटी आकांक्षा राजावत ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस प्रकरण की सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट का मूल्यवान समय बर्बाद हुआ है। ऐसे में भिंड कलेक्टर हाई कोर्ट रजिस्ट्री में 25 हजार रुपए जमा कराएं। इस आदेश से रामकरण सिंह और उनकी बेटी को मानसिक पीड़ा हुई। इसकी क्षतिपूर्ति के लिए मध्यप्रदेश शासन उनके खाते में 25 हजार रुपए जमा कराएं।

गुना कलेक्टर पर भी रासुका मामले में लगा था जुर्माना

इससे पहले ग्वालियर हाईकोर्ट गुना के ममता डेयरी संचालक प्रेम नारायण ग्वाला की तरफ से दायर की गई याचिका पर गुना कलेक्टर पर भी जुर्माना लगा चुका है। पिछले साल 28 जुलाई को गुना के जगदीश कॉलोनी में संचालित ममता डेयरी पर खाद्य विभाग और प्रशासन ने छापा मारा था। इस दौरान वहां से 500 लीटर से ज्यादा मिलावटी दूध मिला था। गुना कलेक्टर ने इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी और डेयरी संचालक प्रेमनारायण ग्वाल को केंद्रीय जेल ग्वालियर भिजवा दिया था लेकिन कलेक्टर के इस आदेश को उस दौरान शासन से एप्रुवल नहीं मिला था। इसी आधार इस गिरफ्तारी के बाद प्रेमनारायण की तरफ याचिका दाखिल की गई थी। इस केस की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डेयरी संचालक प्रेम नारायण ग्वाल को जमानत दी और फिर कलेक्टर और शासन पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।