एमपी बोर्ड में भ्रष्टाचार: 10वीं की छात्रा की आंसरशीट ही बदल दी | MP NEWS

Updesh Awasthee
भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं), भोपाल मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने 10वीं के परीक्षार्थियों की आंसरशीट ही बदल दी। माशिमं के अधिकारियों ने घोटाले को संरक्षण दिया। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई और बैंच ने मामले की गंभीरता को समझा तब कहीं जाकर खुलासा हो सका। एमपी बोर्ड के खिलाफ 10वीं की छात्रा ने याचिका दाखिल की थी। उसे गणित में 10 नंबर दिए गए थे, जबकि वो क्लास की टॉपर थी। जांच के बाद पाया गया कि उसके 93 नंबर थे परंतु उसकी आंसरशीट बदल दी गई थी। यह तो एक मामला है जो हाईकोर्ट के सामने आया परंतु क्यों ना यह मान लिया जाए कि ऐसे हजारों मामले और भी होंगे जो हाईकोर्ट के सामने नहीं लाए गए। हो सकता है ऐसे ही किसी भ्रष्टाचार के कारण किसी प्रतिभाशाली स्टूडेंट को सुसाइड करना पड़ा हो। 

एमपी बोर्ड के कारण छात्रा को गंभीर मानसिक परेशानी उठानी पड़ी

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने कहा कि छात्रा की कोई गलती नहीं होते हुए भी उसे कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी। तनाव में इतना समय काटना पड़ा। इसके लिए कहीं न कहीं बोर्ड जिम्मेदार है। छात्रा न केवल अदालती खर्च वरन हर्जाना पाने की भी हकदार है। कोर्ट ने माशिमं को एक माह के भीतर छात्रा को 30 हजार रुपए बतौर हर्जाना भुगतान करने के आदेश दिए।

माशिमं ने आंसरशीट ही बदल दी

पिछले साल सिलवानी की रहने वाली खुशी सोनी ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा दी थी। जब रिजल्ट आया, तो उसके होश उड़ गए। उसे गणित में 100 में से 10 अंक मिले थे। छात्रा सीधे हाईकोर्ट पहुंची। याचिका दायर कर खुशी ने कोर्ट से अपील की कि उसकी उत्तर पुस्तिका किसी से बदली गई है। इसकी जांच कराएं। कोर्ट ने माशिमं से जांच कराई तो पता चला कि खुशी की पूरी आंसरशीट एक अन्य छात्रा रजनी हरदयाल से बदल दी गई थी।

7 अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था

इन्हें देखकर बोर्ड के ओआईसी इब्राहिम नंद से पूछा- जिसने अंकसूची बदलने का अनैतिक कार्य किया है, उसे क्या सजा दी गई। नंद ने बताया कि सिलवानी के पुष्पा हाईस्कूल में बने परीक्षा केंद्र में दोनों छात्राओं की कॉपी में अंकित एनरोलमेंट नंबर के आखिरी दो अंक बदल दिए गए थे। मामले में केंद्राध्यक्ष पीके नीखरा, सहायक केंद्राध्यक्ष शरद मालवीय, पर्यवेक्षक ललित शाक्य, मूल्याकंन अधिकारी अनिल खंतवाल, मुख्य परीक्षक महेंद्र सिंह रघुवंशी, उपमुख्य परीक्षक महेंद्र जैन और परीक्षक राजाराम सेन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

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