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अतिथि विद्वानों का आंदोलन मंत्री जीतू पटवारी की बिफलता का प्रमाण है | ATITHI VIDWAN NEWS

भोपाल। शाहजहांनी पार्क भोपाल में अतिथिविद्वान पिछले 38 दिनों से कांग्रेस सरकार को उसका वचन 17.22 स्मरण कराने के उद्देश्य से धरना आंदोलन कर रहे है किंतु सरकार में शायद अतिथिविद्वानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। विदित हो कि विगत 2 दिसम्बर से मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र छिन्दवाड़ा से प्रारंभ हुई भविष्य सुरक्षा यात्रा लगातार पैदल चलती हुई 10 दिसंबर को राजधानी भोपाल स्थित शाहजहांनी पार्क भोपाल पहुँची थी। तब से अतिथिविद्वानो ने सरकार से नियमितीकरण की मांग लगातार जारी रखी है। 

इस दौरान सत्ता पक्ष से कई नेतागण धरनास्थल पधारे किन्तु अब तक अतिथि विद्वानों की नियमितीकरण की मांग व उनकी समस्या का समाधान कमलनाथ सरकार व उसके उच्च शिक्षा मन्त्री जीतू पटवारी नही ढूंढ सके है। उल्लेखनीय है कि एक माह से अधिक समय से चल रहे अतिथिविद्वानों के आंदोलन को शिक्षाविद व जानकार मंत्री जीतू पटवारी की भारी असफलता मान कर चल रहे है। क्योंकि अब तक शायद मंत्री जीतू पटवारी अतिथिविद्वानों की समस्या से अपने आप को नही जोड़ सके हैं। 

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह एवं डॉ सुरजीत भदौरिया के अनुसार मंत्री जीतू पटवारी यदि गंभीरतापूर्वक हमारी मांगों पर विचार करें तो निसंदेह जल्द इसका हल ढूंढा जा सकता है। किन्तु मंत्रीजी शायद अधिकारियों की बताई गई बातें ही सुनते हैं जिससे की अब तक हमारी समस्या का कोई सकारात्मक उपचार नही खोज पाए हैं।

प्रदेश में उच्च शिक्षा की रीढ़ हैं अतिथि विद्वान


अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ मंसूर अली के अनुसार सूबे के सरकारी कॉलेजों में पिछले दो दशकों से अध्यापन कार्य करते आ रहे अतिथिविद्वान प्रदेश की उच्च शिक्षा की रीढ़ है। 30 वर्षों तक कोई नियमित नियुक्ति न हो पाने से सरकारी कालेज शिक्षक विहीन थे। ऐसी स्थिति में अतिथिविद्वानो ने महाविद्यालयों की पठन पाठन, परीक्षा, पाठ्येत्तर गतिविधियां, मूल्यांकन, सेमेस्टर प्रणाली जैसी व्यवस्थाओं को बखूबी संभाला है। किन्तु यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज काम निकल जाने के बाद उच्च शिक्षा विभाग व कांग्रेस सरकार इन्ही अतिथिविद्वानों से सौतेला व्यवहार कर रही है।

नियमितीकरण तक जारी रहेगा आंदोलन

अतिथिविद्वान नियामितिक्रम संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी डॉ जेपीएस चौहान एवं डॉ आशीष पांडेय के अनुसार ये आंदोलन हमारे नियामियिकरण के लिए अंतिम संघर्ष है। जब तक हमारा नियमितीकरण पूरा नही हो जाता आंदोलन जारी रहेगा।