अयोध्या विवाद का फैसला, महत्वपूर्ण हेडलाइंस, और ब्रेकिंग न्यूज़ | Ayodhya dispute verdict, important headlines, and breaking news

Bhopal Samachar
नई दिल्ली। शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज और इसी हेड लाइन के साथ आज देश की सबसे बड़ी खबर की शुरुआत हो गई। या हम आप को न केवल अयोध्या विवाद का फैसला बताएंगे बल्कि देशभर में चल रही घटनाओं से भी अवगत कराएंगे जो इससे संबंधित है तो कृपया इसे बुकमार्क करने एवं रिफ्रेश करते रहे: 

गृह मंत्री अमित शाह ने एक हाई लेवल मीटिंग मिलाई। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड भी मौजूद है। 
सारे देश में पुलिस एवं सिक्योरिटी गार्ड अलर्ट। 
लोग घरों में टीवी और मोबाइल पर खबरें सुन रहे हैं। 
फैसला: सुप्रीम कोर्ट में शिया वक्फ बोर्ड की याचिका को सभी पांचों जजों ने खारिज कर दिया।  जमीन पर अब शिया वक्फ बोर्ड का कोई मालिकाना हक का दावा नहीं रह गया। पक्षकारों में अब केवल सुन्नी वक्फ बोर्ड है।

फैसला: निर्मोही अखाड़े की याचिका खारिज। 
कोर्ट ने रामलला विराजमान को पक्षकार स्वीकार किया।
खुदाई में मिला ढांचा गैर इस्लामिक का: सुप्रीम कोर्ट 
जहां बाबरी मस्जिद बनाई गई वह खाली जमीन नहीं थी: सुप्रीम कोर्ट
अयोध्या ही भगवान श्रीराम का जन्म स्थान, निर्विवाद है, दोनों पक्ष मानते हैं: सुप्रीम कोर्ट
हिंदुओं की आस्था है कि भगवान राम की जन्म गुंबद के नीचे हुआ था। आस्था वैयक्तिक विश्वास का विषय है: सुप्रीम कोर्ट पुरातात्विक साक्ष्य हिंदू मूल की एक अंतर्निहित संरचना का समर्थन करते हैं। हालांकि एएसआई यह साबित नहीं कर पाया कि मस्जिद हिन्दू मंदिर को तोड़ कर बनाया गया थाः सुप्रीम कोर्ट

पीएम नरेंद्र मोदी सुखबीर बादल डेरा बाबा नानक में


पंजाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गुरदासपुर के भाजपा सांसद, सनी देओल, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर बादल डेरा बाबा नानक पहुंचे


एक ट्रस्ट बनाया जाए 3 महीनों में ट्रस्ट का विधिवत गठन हो और एक योजना बनाई जाए: सुप्रीम कोर्ट 
यह जो नया ट्रस्ट व सरकार बनाइए: सुप्रीम कोर्ट
मस्जिद के लिए मुस्लिम पक्षकारों को दूसरी जगह जमीन दी जाएगी: सुप्रीम कोर्ट
सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना दावा साबित नहीं कर पाया: सुप्रीम कोर्ट
विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को दी जाए: सुप्रीम कोर्ट
मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन दी जाएगी: सुप्रीम कोर्ट
मस्जिद के लिए अयोध्या में खास जगह पर जमीन दी जाए: सुप्रीम कोर्ट

विवादित जमीन जो सरकार के कब्जे में है वह सरकार के पास ही रहेगी।
उस जमीन पर मंदिर निर्माण एवं उसके रखरखाव के लिए एक सरकारी ट्रस्ट बनाया जाएगा।
केंद्र सरकार को 3 महीने के भीतर ट्रस्ट बनाकर योजना प्रस्तुत करनी है।
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