जन अभियान परिषद ने 12 हजार छात्रों को 9-9 हजार बांटे थे, अब रिकवरी होगी | MP NEWS

भोपाल। जन अभियान परिषद ने मध्यप्रदेश में कई चमत्कार किए। यह सरकारी खजाने से फायदा उठाने वाला संगठन बनकर रह गया था। कर्मकार मंडल के सर्वे के नाम पर 12 हजार छात्रों को 9-9 हजार बांट दिए गए थे। मजेदार बात यह है कि सर्वे हुआ ही नहीं। अब कमलनाथ सरकार ने रिकवरी आदेश जारी ​कर दिए हैं।

मामला क्या है

करीब एक साल पहले मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम कोर्स के 12 हजार छात्रों से कर्मकार मंडल का सर्वे करने का टास्क दस्तावेजों में दिया गया। तय किया गया कि इसके तहत उन्हें 12 हजार रुपए पारिश्रमिक के रूप में भुगतान किया गया जाएगा। इसके बाद काम शुरू होने से पहले ही पहली किस्त के रूप में प्रत्येक छात्र को 9 हजार रुपए दे दिए गए और बात यहीं खत्म हो गई। ना तो सर्वे हुआ और ना ही जन अभियान परिषद के अफसरों ने सर्वे पूर्ण कराने की तरफ ध्यान दिया।

अब क्या दलील दी जा रही है

जन अभियान परिषद के अधिकारियों की तरफ से अब दलील दी जा रही है कि कर्मकार मंडल के सर्वे के लिए श्रम विभाग की एप्लीकेशन ने ठीक से काम नहीं किया। इस कारण छात्र डाटा अपलोड नहीं कर सके। अब रिकवरी कैसे की जा सकेगी, क्योंकि बहुत से विस्तार कार्यकर्ता संपर्क में नहीं हैं।

सही बात है, जन अभियान परिषद की क्या गलती

सवाल यह है कि यदि एप्लीकेशन काम नहीं कर रही थी तो जन अभियान परिषद के लोगों ने उसे दुरुस्त कराने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया। क्या कोई लिखापढ़ी है जो यह प्रमाणित कर दे कि जन अभियान परिषद हर हाल में सर्वे पूरा करना चाहती थी। यदि 12 हजार छात्रों में 10 करोड़ रुपए वितरित किए जा सकते हैं तो सर्वे पूरा करने के लिए 10 हजार रुपए की नई एप्लिकेशन भी बनवाई जा सकती थी। यह सबकुछ संभव था क्योंकि जन अभियान परिषद तो सीएम शिवराज सिंह के सबसे नजदीक थीं

कहीं यह चुनाव प्रचार हेतु पारिश्रमिक तो नहीं था

अब यह केवल आरोप नहीं रहा कि जन अभियान परिषद ने शिवराज सिंह चौहान का प्रचार किया था। दर्जनों वाट्सएप मैसेज और फेसबुक स्क्रीनशॉट सुरक्षित हैं जो यह बताते हैं कि जन अभियान परिषद के लोग चुनाव प्रचार कर रहे थे। कहीं यह 10 करोड़ रुपए चुनाव प्रचार के लिए तो खर्च नहीं किया गया जिसे सर्वे का नाम देकर सरकारी खजाने से निकाल लिया गया।